आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: भारत की विकास दर मजबूत, वैश्विक जोखिमों पर सतर्कता

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। बजट से एक दिन पहले जारी यह रिपोर्ट देश की आर्थिक स्थिति और आगे की दिशा का आधिकारिक आकलन मानी जाती है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के नेतृत्व में तैयार इस दस्तावेज में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है, हालांकि बाहरी जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विकास दर का अनुमान
सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। यह चालू वर्ष के अनुमानित 7.4 प्रतिशत से कुछ कम है, लेकिन वैश्विक मंदी के माहौल में इसे संतोषजनक माना गया है।
महंगाई पर काबू
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत महंगाई दर 1.7 प्रतिशत रही। कोर इन्फ्लेशन में गिरावट से संकेत मिलता है कि आपूर्ति से जुड़ी बाधाएं कम हुई हैं और कीमतों पर नियंत्रण बना हुआ है।
वैश्विक मोर्चे पर दबाव
हालांकि घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बताए गए हैं, लेकिन विदेशी निवेश और मुद्रा से जुड़े जोखिम बने हुए हैं। सर्वे में कहा गया है कि 2025 के दौरान विदेशी पूंजी प्रवाह में कमी के कारण रुपये पर दबाव देखा गया।
राजकोषीय स्थिति में सुधार
सरकार की वित्तीय सेहत बेहतर होने का दावा किया गया है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8 प्रतिशत रहा, जबकि अगले वर्ष इसे 4.4 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य तय किया गया है।
राज्यों की खर्च नीति पर चेतावनी
सर्वे में राज्यों द्वारा बिना शर्त नकद योजनाओं और लोकलुभावन खर्चों पर चिंता जताई गई है। कहा गया है कि इससे पूंजीगत निवेश प्रभावित हो रहा है और आगे चलकर उधारी महंगी पड़ सकती है।
बुनियादी ढांचे में तेज निवेश
अर्थव्यवस्था को गति देने में इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश को अहम बताया गया है। केंद्र का पूंजीगत व्यय FY18 के 2.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 11.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हाई-स्पीड कॉरिडोर और रेलवे नेटवर्क में भी बड़ा विस्तार दर्ज किया गया है।
विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती
16 जनवरी 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो करीब 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त माना गया है।
उद्योग और रोजगार की तस्वीर
बिजली वितरण कंपनियों ने पहली बार लाभ दर्ज किया है। पीएलआई योजना के तहत 14 क्षेत्रों में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आया है और लाखों नए रोजगार बने हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
गरीबी में गिरावट
नीति आयोग के आंकड़ों के आधार पर सर्वे में बताया गया कि बहुआयामी गरीबी 2005-06 के 55 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में करीब 11 प्रतिशत रह गई है।
नवाचार और नौकरियां
भारत की ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंकिंग में भी सुधार हुआ है और रोजगार पोर्टलों पर करोड़ों रिक्तियां दर्ज की गई हैं।
कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 यह संकेत देता है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर और आगे बढ़ने की स्थिति में है। हालांकि राज्यों की वित्तीय स्थिति और विदेशी पूंजी प्रवाह जैसे मुद्दों पर आगामी बजट में खास ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।
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