री-नीट पेपर का झांसा देकर ठगी, साइबर क्राइम ब्रांच ने राजस्थान से दो आरोपी दबोचे

HIGHLIGHTS
- री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर छात्रों और अभिभावकों से कथित ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
- पुलिस के अनुसार आरोपी टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी दावे कर लोगों से पैसे वसूलते थे।
- टेलीग्राम चैनलों के जरिए फैलाया जाता था झांसा जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों ने कई टेलीग्राम चैनल, ग्रुप और आईडी बनाकर यह प्रचार किया कि उनके पास री-न…
अहमदाबाद। री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर छात्रों और अभिभावकों से कथित ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी दावे कर लोगों से पैसे वसूलते थे।
टेलीग्राम चैनलों के जरिए फैलाया जाता था झांसा
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों ने कई टेलीग्राम चैनल, ग्रुप और आईडी बनाकर यह प्रचार किया कि उनके पास री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र और गोपनीय जानकारी उपलब्ध है। परीक्षा को लेकर चिंतित छात्रों और उनके अभिभावकों को सोशल मीडिया पोस्ट, विज्ञापनों और संदेशों के माध्यम से निशाना बनाया जाता था।
पुलिस का कहना है कि प्रश्नपत्र और विशेष जानकारी देने के नाम पर लोगों से रकम ली जाती थी, लेकिन भुगतान के बाद आरोपियों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। न तो कोई प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाता था और न ही पैसे वापस किए जाते थे।
री-नीट पेपर लीक नहीं हुआ था: पुलिस
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शरद सिंघल ने स्पष्ट किया कि यह मामला प्रश्नपत्र लीक से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने केवल फर्जी दावे कर लोगों को भ्रमित किया और आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश की। पुलिस जांच में अब तक री-नीट पेपर लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
जयपुर और कोटा से हुई गिरफ्तारी
तकनीकी जांच, मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस, टेलीग्राम अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने राजस्थान के जयपुर और कोटा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनकी पहचान सुमेर सिंह मीणा और आकाश मीणा के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार सुमेर सिंह आईटीआई पास है, जबकि आकाश मीणा स्नातक शिक्षित है। दोनों पर साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क चलाने का आरोप है।
फर्जी लोकप्रियता दिखाने के लिए बढ़ाए जाते थे सदस्य
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने टेलीग्राम चैनलों में सदस्यों और प्रीमियम यूजर्स की संख्या बढ़ाने के लिए थर्ड पार्टी सेवाओं का सहारा लिया। इससे चैनलों को अधिक विश्वसनीय दिखाया जाता था और नए लोगों को जोड़ना आसान हो जाता था।
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य खुद ही चैनलों पर संदेश पोस्ट कर यह दावा करते थे कि पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों की उनकी जानकारी काफी हद तक सही साबित हुई थी, जिससे लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की जाती थी।
निवेश धोखाधड़ी से भी जुड़े मिले तार
साइबर क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी पता चला कि आरोपी कुछ टेलीग्राम चैनलों के जरिए निवेश योजनाओं में अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों को फंसाने का काम भी कर रहे थे। पुलिस को ऐसे कई बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली है, जिनका संबंध अलग-अलग राज्यों से दर्ज शिकायतों से जुड़ा बताया जा रहा है।
1,000 से अधिक लोगों को बनाया शिकार
अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के खातों में पिछले एक वर्ष के दौरान 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन दर्ज हुआ है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि 1,000 से अधिक छात्र और अभिभावक इस ठगी का शिकार हुए हो सकते हैं।
कई राज्यों में जांच जारी
पुलिस अब राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां धन के लेन-देन, विज्ञापन संचालन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने वाले अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाल रही हैं।
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