पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी की खबरें गलत, सरकार ने किया खंडन

HIGHLIGHTS
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चल रही अटकलों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक और आधारहीन बताया है।
- मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन सरकार के स्तर पर ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
- यह सफाई उस समय आई है जब एक संस्थागत रिपोर्ट के हवाले से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि आने वाले समय में ईंधन की कीमत…
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चल रही अटकलों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक और आधारहीन बताया है।
मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन सरकार के स्तर पर ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
यह सफाई उस समय आई है जब एक संस्थागत रिपोर्ट के हवाले से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतें 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं। इसके साथ यह भी चर्चा थी कि चुनावी प्रक्रिया के बाद दामों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी खबरें आम लोगों के बीच अनावश्यक चिंता और भ्रम पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं।
मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
सरकारी बयान के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां और सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं, ताकि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?
भारत में ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं। सबसे बड़ा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का होता है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल इसी से तैयार किए जाते हैं।
इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए रुपये के कमजोर होने पर कीमतें प्रभावित होती हैं।
केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों का वैट (VAT) भी अंतिम खुदरा कीमतों को तय करने में बड़ा योगदान देता है, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों में दामों में अंतर देखने को मिलता है।
रिफाइनिंग लागत, उत्पादन प्रक्रिया और क्रूड ऑयल के प्रकार के अनुसार भी कीमतों में बदलाव होता है। साथ ही घरेलू मांग और आपूर्ति की स्थिति भी ईंधन दरों को प्रभावित करती है।
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