शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी एक फीसदी से ज्यादा टूटे

शेयर बाजार में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
30 शेयरों वाला सेंसेक्स 982.71 अंक यानी 1.27% गिरकर 76,681.29 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि 50 शेयरों वाला निफ्टी 275.10 अंक यानी 1.14% टूटकर 23,897.95 पर आ गया।
इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भी बाजारों पर साफ दिखाई दिया। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे निवेशकों में सतर्कता देखी गई।
वहीं, विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपया दबाव में रहा और डॉलर के मुकाबले 22 पैसे कमजोर होकर 94.23 के स्तर पर बंद हुआ।
वैश्विक बाजारों में मिला-जुला रुख
अमेरिकी बाजारों में वॉल स्ट्रीट के रिकॉर्ड स्तर से नीचे आने के बाद वायदा कारोबार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
- S&P 500 फ्यूचर्स में 0.1% की हल्की बढ़त
- डाउ जोन्स फ्यूचर्स में 0.2% की गिरावट
यूरोप के प्रमुख बाजारों में शुरुआती कारोबार कमजोर रहा—
- जर्मनी का DAX 0.2% गिरकर 24,106.17 पर
- फ्रांस का CAC 40 1% टूटकर 8,147.70 पर
- ब्रिटेन का FTSE 100 0.6% गिरकर 10,397.64 पर
एशियाई बाजारों का प्रदर्शन
एशिया में कारोबार के दौरान मिला-जुला रुख देखने को मिला—
- जापान का निक्केई 225 करीब 1% चढ़कर 59,716.18 पर पहुंचा, तकनीकी शेयरों में खरीदारी का असर
- हांगकांग का हैंग सेंग 0.2% की बढ़त के साथ 25,978.07 पर बंद
- चीन का शंघाई कंपोजिट 0.1% गिरकर 4,079.90 पर
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग स्थिर रहकर 6,475.63 पर बंद
- ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 0.1% गिरा
- ताइवान का ताइएक्स 3.2% उछला, जिसमें TSMC के शेयरों में 5.1% की तेजी रही
पश्चिम एशिया में तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और कूटनीतिक वार्ताओं में ठहराव का असर वैश्विक बाजारों पर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम से जुड़ी बातचीत में सीमित प्रगति हुई है। इसी बीच ऊर्जा आपूर्ति मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक प्रमुख रास्ता माना जाता है।
तनाव के चलते इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ा है और कई तेल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
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