पश्चिम में हाईकोर्ट बेंच !

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच स्थापना की मांग के समर्थन में बुधवार 17 दिसंबर को पश्चिमांचल के 22 जिलों में बंद रहा। हाई कोर्ट बेंच स्थापना केन्द्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय शर्मा ने दावा किया कि बन्द को व्यापक समर्थन मिला है। शिक्षण संस्थाएँ, अस्पताल, मेडिकल स्टोर, यहां तक कि पैट्रोल पम्प भी बन्द रहे।
मुजफ्फरनगर जिला बार संघ व सिविल बार के पदाधिकारीगण भी स्थानीय व्यापारी संगठनों से सम्पर्क कर बंद में सहयोग की अपील कर रहे थे। पश्चिम में हाईकोर्ट की पीठ स्थापना की दशकों पुरानी माँग अभीतक मानी नहीं गई। यह सभी जानते हैं कि उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित होने से पूर्वांचल की अर्थनीति व राजनीति प्रभावित होती है। इसी कारण न्यायोचित मांग को टरकाया जा रहा है।
कुछ लोग हर परास्थिति में राजनीति तलाशने के आदी है। वे इस मांग को जन-आन्दोलन बनाने के बजाए जनप्रतिनिधियों- मंत्रियों, सांसदों, विधायकों पर वक्तव्यों के गोले दागने से बाज नहीं आते। इन्हें हर मौके पर मीडिया के माइक और कैमरे की दरकार रहती है।
जहां तक मुजफ्फरनगर के जन प्रतिनिधियों का प्रश्न है, पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान आज ही केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल तथा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मिलकर खंडपीठ स्थापना की मांग की। उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। मुजफ्फरनगर के सांसद हरेन्द्र मलिक तथा बिजनौर के सांसद चन्दन चौहान, मेरठ के सांसद अरुण गोविल एवं बागपत के राजकुमार सांगवान ने संसद में खंडपीठ की स्थापना की मांग जोरशोर से उठाई है।
17 दिसंबर के पश्चिम बन्द के बाद भी यह कहने की गुंजाइश है कि खंडपीठ की स्थापना का मुद्दा अभी भी अधिवक्ताओं का मुद्दा है, आम जन का नहीं, जबकि बेंच स्थापना से करोड़ों लोगों को राहत मिलेगी। जन आन्दोलन को धार दिये बिना न्यायोचित मांग को कौन सुनेगा। उत्तरप्रदेश में अलग-अलग दलों की सरकार आईं, सबने टालू मिक्चर पिलाया। सोचने की जरूरत है कि दोपहर बाद दुकानें क्यों खुल गई।
गोविंद वर्मा (संपादक 'देहात')
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