NEET UG पुनर्परीक्षा की तैयारियों को लेकर केंद्रीय गृह सचिव ने की उच्च स्तरीय बैठक

नई दिल्ली। NEET UG पुनर्परीक्षा 2026 की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा को लेकर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक हाल ही में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों के बाद आयोजित की गई, जिसमें परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में गृह सचिव ने सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पुनर्परीक्षा के संचालन में किसी भी प्रकार की चूक न हो और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी।
सरकार की ओर से छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि परीक्षा के दिन अभ्यर्थियों को यात्रा या लॉजिस्टिक से जुड़ी किसी समस्या का सामना न करना पड़े। रेलवे बोर्ड ने भी आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त ट्रेनें चलाने और विशेष व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है।
इस बैठक में कई केंद्रीय मंत्रालयों और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, डाक विभाग, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, रक्षा मंत्रालय और उच्च शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि तथा एनटीए के महानिदेशक भी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने प्रश्न पत्रों की सुरक्षित ढुलाई, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था और संभावित गड़बड़ियों को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा ढांचे पर विस्तार से चर्चा की। केंद्रीय सुरक्षा बलों की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए गंभीर है।
गौरतलब है कि पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में विरोध और छात्रों में नाराजगी देखने को मिली थी। इसी कारण परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे और जवाबदेही की मांग तेज हुई। बाद में 3 मई को आयोजित परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को कराने का फैसला लिया। पहले 3 मई को हुई परीक्षा में देशभर के 5,000 से अधिक केंद्रों पर करीब 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था। पुनर्परीक्षा के फैसले से कुछ अभ्यर्थियों में असंतोष भी देखा गया, हालांकि सरकार का दावा है कि यह कदम परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
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