आईडीबीआई बैंक की बिक्री प्रक्रिया फिर से शुरू, सरकार करेगी रीवैल्यूएशन

नई दिल्ली: पिछले करीब पांच सालों से आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी चल रही थी, लेकिन अब यह पूरी प्रक्रिया शुरुआत से दोबारा शुरू की जाएगी। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को बैंक बेचने के लिए जो वित्तीय बोलियां मिलीं, वे तय की गई न्यूनतम कीमत (रिजर्व प्राइस) से काफी कम थीं। यही वजह है कि पिछले हफ्ते इस प्रक्रिया को रोक दिया गया।
प्रक्रिया में सबसे बड़ी चूक
विशेषज्ञों का कहना है कि इस असफलता की मुख्य वजह रिजर्व प्राइस तय करने का तरीका था। बैंक की केवल 5 प्रतिशत शेयर पब्लिक के पास हैं, जबकि 45.48 प्रतिशत सरकार और 49.24 प्रतिशत भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास सुरक्षित हैं। इतने कम शेयर होने के कारण बाजार में उनकी कीमत में आसानी से उतार-चढ़ाव आ सकता है और मार्केट मैनिपुलेशन का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण माना जा रहा है कि बोली उम्मीद से कम आई।
सरकार जल्द ही एक विशेष पैनल के माध्यम से इस पूरे मामले की समीक्षा करेगी और इसके आधार पर नई बिक्री प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी।
निवेशकों पर असर
निजीकरण की अटकलबाजी का असर निवेशकों पर भी पड़ा है। इस साल जनवरी में जब बिक्री चर्चा चरम पर थी, बैंक का शेयर 118.38 रुपये पर पहुंच गया था। लेकिन बोलियों के रद्द होने की खबर के बाद शेयर में करीब 19 प्रतिशत की गिरावट आई और मंगलवार को 74.28 रुपये पर बंद हुआ। यह 7 अप्रैल 2025 के निचले स्तर 72 रुपये के करीब है, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है।
नई प्रक्रिया और खरीदारों के लिए शर्तें
सरकार इस बार प्रक्रिया को बिना देरी के अंजाम देना चाहती है। पिछली बार फेयरफैक्स फाइनेंशियल और अमीरात एनबीडी ने बोलियां दी थीं। अधिकारियों ने बताया कि यदि ये कंपनियां दोबारा भाग लेती हैं, तो उन्हें फिर से क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं होगी।
हालांकि, किसी भी खरीदार को RBI के फिट एंड प्रॉपर मानक पर खरा उतरना होगा। साथ ही CCI जैसी संस्थाओं से मंजूरी और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के हितों के लिए ओपन ऑफर देना भी अनिवार्य होगा।
सरकार ने इस बीच आईडीबीआई के किसी अन्य सरकारी बैंक में विलय की अटकलों को खारिज कर दिया है और कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है।
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