फिलीपींस में राजनाथ सिंह बोले- क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आपसी विश्वास जरूरी

HIGHLIGHTS
- राजनाथ सिंह ने फिलीपींस में 13वीं ADMM-Plus बैठक में भाग लिया।
- बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर जोर दिया गया।
- भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए सहयोग की अहमियत बताई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आसियान की केंद्रीय भूमिका भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति उसके दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) से सदस्य देशों के बीच विश्वास मजबूत होगा। साथ ही, उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
फिलीपींस के सेबू में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आसियान की केंद्रीय भूमिका के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है। उन्होंने कहा कि यह मंच एक मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्र के निर्माण के लिए अहम है। उन्हें उम्मीद है कि बैठक के माध्यम से आपसी विश्वास बढ़ेगा, नई चुनौतियों का सामना करने में सहयोग मिलेगा और रक्षा संबंधों को मजबूती मिलेगी।
फिलीपींस का जताया आभार
राजनाथ सिंह ने ADMM-Plus बैठक के आयोजन और गर्मजोशी से स्वागत के लिए फिलीपींस का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस मंच पर साझा सुरक्षा चिंताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
क्या है भारत की एक्ट ईस्ट नीति?
भारत की एक्ट ईस्ट नीति का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना, सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना है। इसके तहत द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय स्तर पर संवाद और संपर्क को बढ़ावा दिया जाता है।
इस नीति में पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, खासकर अरुणाचल प्रदेश, की पड़ोसी देशों के साथ संपर्क सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाता है। भारत और आसियान के बीच सहयोग को देश में बुनियादी ढांचे के विकास, विनिर्माण, व्यापार, कौशल विकास, शहरी नवीनीकरण, स्मार्ट सिटी और मेक इन इंडिया जैसी पहलों से भी जोड़ा गया है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत का दृष्टिकोण
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। इस क्षेत्र के लिए भारत का विजन 'महासागर' यानी म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन (MAHASAGAR) है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) की शुरुआत की थी। यह पहल भारत के समुद्री दृष्टिकोण को दिशा देने का काम करती है।
फिलीपींस के रक्षा मंत्री से द्विपक्षीय वार्ता
ADMM-Plus बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा सचिव गिल्बर्टो सी. टेओडोरो जूनियर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की। दोनों नेताओं ने मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा की और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। बातचीत में समुद्री सुरक्षा और संयुक्त रक्षा उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया गया।
इससे पहले गुरुवार को फिलीपींस के सेबू स्थित मैक्टन एक्सपो पहुंचने पर राजनाथ सिंह को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वह 13वीं ADMM-Plus बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ भाग लेने वाले देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM) संगठन के भीतर रक्षा मामलों पर विचार-विमर्श और सहयोग का सर्वोच्च मंच है। ADMM-Plus में आसियान के 11 सदस्य देशों के साथ आठ संवाद साझेदार देश भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं।
ADMM-Plus में भारत की भूमिका
भारत 1992 में आसियान का संवाद साझेदार बना था। ADMM-Plus की पहली बैठक 12 अक्टूबर 2010 को वियतनाम की राजधानी हनोई में हुई थी। 2017 से इस मंच के रक्षा मंत्री क्षेत्रीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए हर साल बैठक कर रहे हैं।
2026 में फिलीपींस इस बैठक की अध्यक्षता कर रहा है। भारत 2024 से 2027 के कार्यकाल के लिए मलेशिया के साथ आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता भी कर रहा है। इस मंच पर भारत की भागीदारी दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रक्षा और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की उसकी कोशिशों को दर्शाती है। यह देश की एक्ट ईस्ट नीति का भी हिस्सा है।
पांच देशों के रक्षा नेताओं से की बातचीत
ADMM-Plus बैठक से अलग राजनाथ सिंह ने बुधवार को फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इन बैठकों में रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा सचिव गिल्बर्टो सी. टेओडोरो जूनियर के साथ बातचीत में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने, समुद्री सुरक्षा और संयुक्त रक्षा उत्पादन पर विचार किया। राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री से मुलाकात
राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री कांग शिन-चुल के साथ भी बैठक की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। इसके साथ ही सैन्य तकनीक के संयुक्त विकास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।
जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के साथ हुई बातचीत में दोनों पक्षों ने अगस्त में पिछली मुलाकात के बाद रक्षा सहयोग में हुई प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने उस समय तय की गई प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की समीक्षा
अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बैठक में राजनाथ सिंह ने भारत-अमेरिका प्रमुख रक्षा साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों ने सुरक्षा से जुड़े बुनियादी समझौतों के तहत हुई प्रगति पर चर्चा की। इसके अलावा, सैन्य तैयारियों को बेहतर बनाने, तकनीक साझा करने और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों देशों ने आतंकवाद और सीमा पार से पैदा होने वाले खतरों से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई।
राजनाथ सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन देशों के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं दिखानी चाहिए, जो आतंकवादी संगठनों को समर्थन देते हैं, उन्हें प्रशिक्षण देते हैं या आर्थिक मदद पहुंचाते हैं। मंत्रालय के अनुसार, पीट हेगसेथ ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अमेरिका के समर्थन की पुष्टि की।
ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा सहयोग पर चर्चा
राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा की और सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की।
राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को काफी महत्व देता है।
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