इंडिया-ईयू एफटीए बनेगा ‘गेमचेंजर’, भारत को मिलेगा अरबों डॉलर का फायदा

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) केवल कूटनीतिक पहल नहीं, बल्कि देश के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर साबित हो सकता है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता का उपयोग करते हुए बिना किसी अतिरिक्त निवेश के यूरोपीय बाजार में 10 से 11 अरब डॉलर तक अतिरिक्त निर्यात कर सकता है।
यह फायदा अमेरिका को भेजे जाने वाले उन उत्पादों को यूरोप की ओर मोड़कर संभव है, जिन पर फिलहाल ज्यादा टैरिफ लगता है। इस रणनीतिक बदलाव से भारत को नए बाजार मिल सकते हैं और व्यापार जोखिम भी घटेगा। रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले तीन वर्षों से भारत-ईयू का माल व्यापार करीब 136.5 अरब डॉलर पर स्थिर बना हुआ है।
एफटीए से बदलेगा व्यापार संतुलन
रुबिका डेटा साइंसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, यह संभावित पुनर्संतुलन उस दौर में सामने आया है जब यूरोपीय संघ ने कुछ श्रम-प्रधान भारतीय उत्पादों को सामान्यीकृत वरीयता योजना (GSP) से बाहर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए भारत के वैश्विक व्यापार दृष्टिकोण को मजबूती देगा, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति जैसे वैश्विक कारक इसे लागू करने में चुनौती पैदा कर सकते हैं।
भारत-ईयू व्यापार की मौजूदा तस्वीर
वित्त वर्ष 2023 से 2025 तक भारत और ईयू के बीच माल व्यापार लगभग 136.5 अरब डॉलर पर बना रहा। वित्त वर्ष 2025 में यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया, जिसने अमेरिका को हल्के अंतर से पीछे छोड़ दिया। इसके बावजूद, ईयू के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी केवल 2.9 प्रतिशत और निर्यात में 1.9 प्रतिशत है।
यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती
रिपोर्ट बताती है कि 21.1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला यूरोपीय संघ 2025 में औसतन 1.4 प्रतिशत की धीमी वृद्धि दर्ज कर रहा है। जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अपेक्षाकृत सुस्त बनी हुई हैं। हालांकि, यूरोपीय संघ का बाहरी व्यापार मजबूत है और 2024 में यह 5.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
अमेरिका-ईयू व्यापार और नए जोखिम
उच्च मूल्य वाले उत्पादों जैसे मशीनरी, वाहन, दवाएं और रसायनों के निर्यात के कारण 2024 में अमेरिका के साथ ईयू का व्यापार अधिशेष बढ़कर 164 अरब डॉलर हो गया। लेकिन नए टैरिफ और नीतिगत अनिश्चितताओं से जोखिम बढ़ सकता है, जिससे ईयू के लिए व्यापार विविधीकरण और जरूरी हो गया है।
भारत के लिए बड़ा निवेश भागीदार
वस्तुओं के व्यापार के अलावा यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख निवेश स्रोतों में भी शामिल है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 तक ईयू से भारत में करीब 119.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है, जो कुल एफडीआई का लगभग 16.5 प्रतिशत है।
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