यूएन में भारत का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, अफगानिस्तान हिंसा पर सुनाई खरी-खरी

HIGHLIGHTS
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों के मुद्दे पर घेरा।
- संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित बहस के दौरान पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर तीखा हमला बोला और कहा कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
- भारत ने कहा कि संघर्ष की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने का सबसे अहम हिस्सा है।
- राजदूत पर्वतनेनी ने संयुक्त…
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों के मुद्दे पर घेरा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित बहस के दौरान पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर तीखा हमला बोला और कहा कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
भारत ने कहा कि संघर्ष की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने का सबसे अहम हिस्सा है। राजदूत पर्वतनेनी ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए नागरिकों की मौत और हिंसा के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर जोर दिया।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि लगातार तीन वर्षों की बढ़ोतरी के बाद 2025 में पहली बार नागरिक मौतों में कुछ कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के 20 सशस्त्र संघर्षों में 37 हजार से ज्यादा नागरिकों की मौत हुई। भारत ने अस्पतालों, स्कूलों और चिकित्सा कर्मियों पर हमलों को बेहद चिंताजनक बताया।
भारत ने आधुनिक युद्ध तकनीकों पर भी चिंता जताई। पर्वतनेनी ने कहा कि आबादी वाले इलाकों में ड्रोन, मिसाइल और विस्फोटक हथियारों का बढ़ता इस्तेमाल आम नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वायत्त हथियार प्रणालियों के इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के दायरे में रखने की मांग की।
पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहा है, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को किसी भी हाल में बचाया नहीं जाना चाहिए।
बहस के दौरान पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों का जिक्र किए जाने पर भारत ने कड़ा जवाब दिया। पर्वतनेनी ने कहा कि जिस देश का खुद नरसंहार और हिंसा का लंबा इतिहास रहा हो, उसका भारत पर टिप्पणी करना विडंबनापूर्ण है।
भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। भारतीय दूत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में पाकिस्तान की सीमा पार कार्रवाई से अफगानिस्तान में सैकड़ों नागरिक हताहत हुए। रिपोर्ट के अनुसार नागरिकों को नुकसान पहुंचाने वाली अधिकांश घटनाओं में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का नाम दर्ज है।
भारत ने मार्च में काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हुए हवाई हमले का भी जिक्र किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि रमजान के दौरान अस्पताल पर हमला बेहद अमानवीय और कायरतापूर्ण था, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए और घायल हुए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में अस्पताल को सैन्य निशाना नहीं बनाया जा सकता।
भारत ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान द्वारा किए गए अत्याचारों की भी याद दिलाई। पर्वतनेनी ने कहा कि ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान पाकिस्तान की सेना ने बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन किए थे, जिन्हें दुनिया कभी नहीं भूल सकती।
अंत में भारत ने सभी देशों से संघर्ष क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का सख्ती से पालन करने की अपील की।
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