भारत के निर्यात में शानदार बढ़ोतरी, लेकिन पश्चिम एशिया संकट ने दिखाया असर

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के कुल निर्यात में 4.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर 860 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर मार्च महीने के व्यापारिक आंकड़ों पर साफ दिखाई दिया, जहां निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण मार्च 2026 में भारत का कुल निर्यात 7.44 प्रतिशत घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गया। खासकर मध्य पूर्व क्षेत्र में निर्यात में 57.95 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है, जबकि इसी क्षेत्र से आयात भी 51.64 प्रतिशत तक कम हुआ।
कुल व्यापारिक प्रदर्शन में सुधार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे वित्तीय वर्ष में भारत का कुल व्यापारिक प्रदर्शन सकारात्मक रहा है। वस्तु और सेवा मिलाकर कुल निर्यात 860 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
- वस्तु निर्यात: 441.78 अरब डॉलर (1% वृद्धि)
- सेवा निर्यात: 418.31 अरब डॉलर (अनुमानित)
- कुल आयात: 774.98 अरब डॉलर (पिछले वर्ष 721.2 अरब डॉलर से अधिक)
आयात में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़ते घरेलू मांग और वैश्विक व्यापार गतिविधियों को दर्शाता है।
पश्चिम एशिया संकट का असर
मार्च महीने में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत के व्यापार पर पड़ा। मध्य पूर्व के साथ व्यापारिक गतिविधियों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हुए। हालांकि, सालाना आधार पर स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।
भारत-ब्रिटेन FTA से उम्मीदें
इन चुनौतियों के बीच एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। वाणिज्य सचिव ने जानकारी दी है कि भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मई 2026 में लागू होने की संभावना है। इस समझौते से आने वाले समय में भारत के निर्यात को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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