भारत का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात 19.6% पर, सुधारों से और बढ़ोतरी की उम्मीद

भारत का कुल टैक्स संग्रह (केंद्र और राज्यों को मिलाकर) अब देश की जीडीपी का 19.6 प्रतिशत है। केंद्रीय सरकार का सकल कर राजस्व अनुपात इस समय 11.7 प्रतिशत पर है। यह स्तर हांगकांग, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे उभरते बाजारों के समान है, लेकिन जर्मनी (38%) और अमेरिका (25.6%) जैसे विकसित देशों के मुकाबले अभी भी काफी कम है। टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात यह दर्शाता है कि कुल अर्थव्यवस्था के मुकाबले सरकार कितने प्रतिशत कर वसूल रही है।
जनसांख्यिकी और आर्थिक विकास से कर संग्रह में वृद्धि का अवसर
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अनुकूल जनसंख्या संरचना और आर्थिक संभावनाओं के चलते कर संग्रह बढ़ाने की पर्याप्त क्षमता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार कर सुधारों पर जोर दे रही है, जिसमें कर प्रणाली का सरलीकरण, डिजिटलीकरण और अनुपालन प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल है। इसके परिणामस्वरूप निकट भविष्य में टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात में और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
नियामकीय बदलाव कर संग्रह में सहायक
रिपोर्ट के अनुसार, आयकर अधिनियम 2025 और कॉरपोरेट टैक्स ढांचे में किए गए सुधार पारदर्शिता बढ़ाने और अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से हैं। इन कदमों का लक्ष्य कर आधार का विस्तार करना और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप में लाना है।
ऐतिहासिक आंकड़े और कर संग्रह का विश्लेषण
आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2014 के बाद से कर संग्रह और नाममात्र जीडीपी के बीच स्पष्ट अभिसरण देखा गया है। वर्तमान में टैक्स इलास्टिसिटी 1.1 है, जो दीर्घकालिक औसत से अधिक है। आयकर और कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह दोनों ही जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय से सकारात्मक रूप से जुड़े हैं।
आयकर अधिनियम 2025 से कर संग्रह को मिलेगा बल
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला नया आयकर अधिनियम कर आधार को व्यापक बनाएगा और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को टैक्स नेट में लाने में मदद करेगा। इससे भारत के टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात में और वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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