60 लाख की बीमा ठगी का खुलासा, मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस ने 3 आरोपियों को दबोचा

मुजफ्फरनगर। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का खुलासा किया है, जिस पर बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी राशि धोखाधड़ी से हड़पने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक बैंक कर्मचारी और एक चिकित्सक भी शामिल हैं। आरोपियों द्वारा करीब 60 लाख रुपये से अधिक की रकम फर्जीवाड़े के जरिए निकालने की बात सामने आई है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने बताया कि साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस टीम ने जांच के दौरान ऐसे तथ्यों का पता लगाया, जिनसे एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। मामले का सफल अनावरण करने वाली टीम को एसएसपी ने 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

जांच में पता चला कि हरिद्वार निवासी एक महिला ने वर्ष 2019 में एक निजी बीमा कंपनी से जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। बाद में आर्थिक कारणों से वह प्रीमियम जमा नहीं कर सकीं और पॉलिसी बंद कर मैच्योरिटी राशि वापस लेने का अनुरोध किया। बीमा कंपनी ने लगभग 60.37 लाख रुपये का चेक जारी कर कूरियर के माध्यम से भेजा था।
आरोप है कि चेक निर्धारित पते तक पहुंचने से पहले ही गायब कर दिया गया। इसके बाद कथित रूप से नाम में हेरफेर कर एक अन्य महिला के बैंक खाते में चेक जमा कराया गया और रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर निकाल ली गई।
जब पीड़िता को धनराशि प्राप्त नहीं हुई तो उन्होंने बीमा कंपनी से संपर्क किया। कंपनी की आंतरिक जांच में अनियमितता सामने आने पर मामला पुलिस तक पहुंचा, जिसके बाद साइबर क्राइम थाना ने विस्तृत जांच शुरू की।

विवेचना के आधार पर पुलिस ने बिरालसी निवासी प्रवीन, पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत रामभूल तथा चरथावल क्षेत्र निवासी डॉ. दिलशाद को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने दो बैंक पासबुक और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा धोखाधड़ी की रकम किन खातों के माध्यम से स्थानांतरित की गई। मामले में आगे की जांच जारी है।
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