ईरान संकट से वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल, कच्चे तेल की कीमतें फिर उछलीं

ईरान से जुड़े युद्धविराम प्रयासों में आई रुकावट और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट का रुख देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, वहां अस्थिरता के चलते आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी कारण ऊर्जा बाजार में फिर से उथल-पुथल देखी जा रही है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड में 1.11 डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 109.34 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं जुलाई अनुबंध 1.08 डॉलर बढ़कर 102.77 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। तुलना करें तो संघर्ष से पहले ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर था, जो तनाव के दौरान 120 डॉलर तक भी पहुंच चुका है। अमेरिकी क्रूड भी 96 सेंट की तेजी के साथ 97.33 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
एशियाई बाजारों पर दबाव
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर एशियाई शेयर बाजारों पर पड़ा है।
- जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.1% गिरकर 59,884.12 पर आ गया
- हांगकांग का हैंग सेंग 0.7% टूटकर 25,751.04 पर बंद हुआ
- शंघाई कंपोजिट में 0.2% की गिरावट दर्ज हुई
- ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी 0.6% नीचे रहा
- हालांकि, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1% की बढ़त के साथ 6,683.10 पर पहुंच गया
बैंक ऑफ जापान का फैसला
बाजार की अस्थिरता के बीच बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में 6-3 के बहुमत से ब्याज दर को 0.75% पर बरकरार रखा है। बैंक ने कहा कि अर्थव्यवस्था मध्यम गति से आगे बढ़ रही है, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें विकास पर दबाव डाल सकती हैं।
वॉल स्ट्रीट में मिला-जुला रुख
अमेरिकी बाजारों में मिश्रित रुझान देखने को मिला।
- S&P 500 0.1% बढ़कर 7,137.91 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
- डाउ जोंस 0.1% गिरकर 49,167.79 पर बंद हुआ
- नैस्डैक में 0.2% की मामूली तेजी दर्ज हुई
बॉन्ड बाजार में भी असर दिखा और 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.31% से बढ़कर 4.33% हो गई।
आगे की दिशा पर नजर
अब वैश्विक निवेशकों की नजर प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आगामी बैठकों पर है। इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड अपने ब्याज दर निर्णय घोषित करेंगे।
इसके साथ ही अल्फाबेट, अमेज़न, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी बड़ी टेक कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता, तब तक वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है।
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