रूस पहुंचा ईरान का प्रतिनिधिमंडल, अमेरिका को मिला सख्त संदेश

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस की आधिकारिक यात्रा पर मॉस्को पहुंच गए हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव और परमाणु मुद्दों को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज बनी हुई है।
इसी बीच रूस की ओर से ईरान के समर्थन में सख्त बयान सामने आया है। वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में रूस के प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सैन्य दबाव और प्रतिबंधों की धमकी देकर ईरान को झुकाने की कोशिश को ब्लैकमेलिंग कहा जा सकता है, लेकिन यह रणनीति सफल नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के लिए अमेरिका को अपने रुख में नरमी लानी चाहिए।
ईरानी विदेश मंत्री का बयान
अराघची ने अपने रूस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह यात्रा युद्ध और मौजूदा हालात को लेकर दोनों देशों के बीच समन्वय का अवसर प्रदान करेगी। ईरानी सरकारी मीडिया को दिए गए एक पूर्व-रिकॉर्डेड इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि रूस के साथ क्षेत्रीय हालात और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के सख्त रुख के कारण प्रस्तावित वार्ताएं प्रभावित हुईं और अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। उनके अनुसार, अधिक मांगों के चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
ईरान की संसद का बयान
इस बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका के बयानों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान के पास भी कई रणनीतिक विकल्प मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल हालात के अनुसार किया जा सकता है। उन्होंने तेल आपूर्ति जैसे क्षेत्रों को ईरान की अहम ताकत बताया।
गालिबाफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए अपने पास “सभी विकल्प होने” की बात कही थी।
कूटनीतिक हलचल तेज
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की कोशिशें जारी हैं। रूस दौरे से पहले ईरानी विदेश मंत्री पाकिस्तान और ओमान की भी यात्रा कर चुके हैं, जहां क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
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