ट्रंप के होर्मुज बंद करने की चेतावनी के बीच भारत पहुंचे ईरानी क्रूड के जहाज

अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार से एक अहम खबर सामने आई है। करीब सात साल बाद ईरानी कच्चे तेल की बड़ी खेप भारत पहुंची है। बताया जा रहा है कि अमेरिका द्वारा दी गई अस्थायी प्रतिबंध छूट के तहत लगभग 40 लाख बैरल तेल लेकर दो सुपरटैंकर भारतीय तटों पर पहुंचे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल हो गई और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
भारत के दो प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंचे टैंकर
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का ‘फेलिसिटी’ नामक विशाल क्रूड कैरियर गुजरात के सिक्का बंदरगाह पर पहुंचा है। इस जहाज में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा है, जिसे मार्च के मध्य में ईरान के खार्ग द्वीप से रवाना किया गया था।
इसी तरह दूसरा टैंकर ‘जया’ ओडिशा के पारादीप तट के पास पहुंचा है, जिसमें भी लगभग इतनी ही मात्रा में तेल मौजूद है। यह खेप फरवरी के अंत में लोड की गई थी।
अस्थायी अमेरिकी छूट से मिली अनुमति
सूत्रों के अनुसार, यह आपूर्ति अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिनों की अस्थायी प्रतिबंध छूट के कारण संभव हो सकी है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में सप्लाई बाधाओं को कम करना और तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।
यह छूट केवल सीमित अवधि के लिए पारगमन और मौजूदा शिपमेंट के निपटान की अनुमति देती है।
खरीदारों पर अनिश्चितता
इन खेपों के आधिकारिक खरीदारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हालांकि पारादीप बंदरगाह मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के संचालन में आता है, जबकि सिक्का टर्मिनल रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) जैसे बड़े खिलाड़ियों के लिए अहम हब माना जाता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और पिछली स्थिति
2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के सख्त होने के बाद भारत ने ईरान से कच्चा तेल आयात पूरी तरह बंद कर दिया था, जबकि 2018 में ईरानी तेल की हिस्सेदारी भारत के कुल आयात में 11.5% तक थी।
उससे पहले भारत प्रतिदिन करीब 5 लाख बैरल से अधिक ईरानी तेल खरीदता था।
आगे क्या हो सकता है
जानकारी के मुताबिक, वर्तमान छूट अवधि 19 अप्रैल तक ही मान्य है। समुद्र में अभी भी करोड़ों बैरल ईरानी तेल मौजूद है, जिसका एक बड़ा हिस्सा भारत और एशियाई बाजारों की ओर जा सकता है।
हालांकि, हालिया राजनीतिक तनाव और बंदरगाहों पर संभावित प्रतिबंधों की चेतावनी के चलते आने वाले दिनों में इस आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी हुई है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.