ज्वेलरी सेक्टर की जोरदार अपील: बजट में राहत और गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम जरूरी

केंद्रीय बजट 2026 से भारतीय जेम्स और ज्वेलरी उद्योग को कई उम्मीदें हैं। प्रमुख मांगों में सोने के आयात शुल्क में कटौती, अनौपचारिक व्यापार पर नियंत्रण और सोने की आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता लाना शामिल है। उद्योग का मानना है कि घरेलू स्तर पर नीतिगत सुधारों से भारत वैश्विक स्वर्ण व्यापार में एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा कि बजट में फिलहाल सोने पर किसी प्रकार के शुल्क बढ़ने की संभावना कम है। उद्योग आयात शुल्क में कमी की मांग कर रहा है और कुछ नई योजनाओं की घोषणाओं की उम्मीद भी रखता है। अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद सरकार ने राहत दी थी, जिससे इस बजट में भी कुछ राहत संबंधी घोषणाएं हो सकती हैं।
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की मांग
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि सरकार इस बजट में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम दोबारा लागू करे। इसके तहत जो लोग निष्क्रिय सोना (जैसे आभूषण, सिक्के, बार) रखते हैं, वे इसे सरकार के पास जमा करवा सकते हैं। इससे सोने के आयात में कमी आएगी और देश में मौजूद अनौपचारिक सोने की आपूर्ति को बाजार में लाया जा सकेगा। इसके अलावा, उद्योग सोने के डोरों पर लगने वाले वर्तमान 5.35% आयात शुल्क में भी कटौती की मांग कर रहा है।
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम क्या है?
यह योजना मार्च 2025 में बंद कर दी गई थी, लेकिन बैंक इसे छोटी अवधि के लिए जारी रख सकते हैं। इस योजना की शुरुआत नवंबर 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के साथ हुई थी और इसका उद्देश्य निजी सोने को वित्तीय सिस्टम में लाना था।
कम शुल्क के पक्ष में उद्योग
बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव कुमार जैन ने कहा कि भारत के वैश्विक स्वर्ण बाजार में प्रभाव बढ़ाने और घरेलू कीमतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के करीब लाने के लिए आयात शुल्क में और कटौती होनी चाहिए। वर्तमान में सोने पर लगभग 6% सक्रिय आयात शुल्क है, जिसमें 5% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 1% कृषि अवसंरचना विकास उपकर शामिल है, साथ ही 3% GST भी लागू है। इस वर्ष अब तक सोने का आयात लगभग 51 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 16% अधिक है। हालांकि, वैश्विक कीमतों में वृद्धि के कारण आयात की मात्रा में 12% की गिरावट आई है।
आसान किस्तों पर ज्वेलरी खरीदारी की मांग
उद्योग का कहना है कि बढ़ती सोने और चांदी की कीमतों के कारण आम लोग आभूषण खरीदने में असमर्थ हैं। इसलिए बजट में सोने और चांदी के आभूषणों की आसान किस्तों पर बिक्री की सुविधा देने की मांग की जा रही है, ताकि आम जनता भी इसे खरीद सके और उद्योग की मांग में स्थिरता बनी रहे।
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