'कश्मीरी पंडितों को जमीन वापस मिली...', उमर अब्दुल्ला ने सदन में पेश किए आंकड़े

श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की कब्ज़ाई गई संपत्तियां उन्हें वापस कर दी गई हैं। विधानसभा में बीजेपी विधायक युद्धवीर सेठी के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि कश्मीरी प्रवासियों की कुल 3,729 कनाल और 4 मरला ज़मीन वापस ली गई और उनके मालिकों को सौंप दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवंबर 2024 से अब तक 844 कनाल और 4 मरला ज़मीन कश्मीरी पंडितों को लौटाई गई है। उन्होंने बताया कि ये संपत्तियां उन लोगों की थीं, जिन्हें 1990 में आतंकवाद और टारगेट किलिंग के कारण घाटी छोड़नी पड़ी थी।
प्रक्रिया अधिनियम के तहत
अब्दुल्ला ने कहा कि जमीन की वापसी की प्रक्रिया ‘जम्मू और कश्मीर प्रवासी अचल संपत्ति (संरक्षण, सुरक्षा और संकटग्रस्त बिक्री पर रोक) अधिनियम’ के प्रावधानों के तहत की जा रही है। ज़िला प्रशासन, जो प्रवासी संपत्तियों के संरक्षक के रूप में कार्यरत है, ने जमीन के मालिकों को लौटाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
ज़िला-वार विवरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि शोपियां में 283 कनाल, बारामूला में 225 कनाल, और गांदरबल में 146 कनाल ज़मीन वापस कर दी गई। वहीं, अनंतनाग, बांदीपोरा, बडगाम, कुलगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा और श्रीनगर जिलों में भी ज़मीन के छोटे हिस्से लौटाए गए हैं।
शिकायत निवारण और संचालन समिति
अब्दुल्ला ने बताया कि प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त उपायुक्तों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जनवरी में गठित संचालन समिति (Steering Committee) इस पूरे कार्यान्वयन की निगरानी कर रही है।
एक ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल पर अब तक 10,173 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 9,713 का निपटारा हो चुका है और 7,829 को मंजूरी मिल चुकी है। केवल 24 मामले लंबित हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि अतिक्रमण के मामलों में FIR दर्ज की जाए, जियो-टैग की गई इन्वेंट्री तैयार की जाए, संपत्ति का हस्तांतरण पारदर्शी तरीके से हो, राजस्व रिकॉर्ड नियमित अपडेट किया जाए और संकट में होने वाली बिक्री (distress sales) पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
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