लद्दाख को राज्य का दर्जा फिलहाल नहीं, लेकिन बातचीत में प्रगति: वांगचुक

HIGHLIGHTS
- लद्दाख को लेकर चल रही लंबे समय से जारी राजनीतिक और प्रशासनिक मांगों के बीच शनिवार को केंद्र सरकार और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में सकारात्मक प्रगति के संकेत मिले हैं।
- हालांकि पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख अभियान से जुड़े सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
- बैठक के बाद सोनम वांगचुक ने बताया कि बातचीत का मुख्य केंद्र लद्दाख में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक अधिकारों को मजबूत करने से जुड़ा था।
- उन्होंने कहा कि लद्दाख वर्षों से संव…
लद्दाख। लद्दाख को लेकर चल रही लंबे समय से जारी राजनीतिक और प्रशासनिक मांगों के बीच शनिवार को केंद्र सरकार और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में सकारात्मक प्रगति के संकेत मिले हैं। हालांकि पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख अभियान से जुड़े सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
बैठक के बाद सोनम वांगचुक ने बताया कि बातचीत का मुख्य केंद्र लद्दाख में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक अधिकारों को मजबूत करने से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि लद्दाख वर्षों से संविधान के अनुच्छेद 244 और छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा और अधिक स्वायत्तता की मांग करता रहा है।
वांगचुक के अनुसार, केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 371 की तर्ज पर कुछ सुरक्षा प्रावधान लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस पर प्रारंभिक सहमति बनी है, लेकिन इसे लागू करने के लिए निर्वाचित विधानसभा जैसी व्यवस्था की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। गृह मंत्रालय में हुई इस बैठक को उन्होंने “सैद्धांतिक सहमति” की दिशा में एक कदम बताया।
बैठक में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। ये दोनों संगठन 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से ही अधिक राजनीतिक अधिकारों और स्थानीय स्वशासन की मांग कर रहे हैं।
राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग पर वांगचुक ने कहा कि फिलहाल यह व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि लद्दाख की आर्थिक स्थिति अभी इतनी मजबूत नहीं है कि वह अपने राजस्व से प्रशासनिक खर्च उठा सके। ऐसे में एक वैकल्पिक ढांचे पर विचार किया जा रहा है, जिसके तहत बिना पूर्ण राज्य का दर्जा दिए स्थानीय स्तर पर एक मजबूत विधायी निकाय स्थापित किया जा सके।
प्रस्तावित ढांचे में इस बात पर भी चर्चा हुई कि इस निकाय के निर्वाचित प्रमुख को प्रशासनिक स्तर पर अधिक अधिकार दिए जाएं, जिनमें मुख्य सचिव और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर प्रभाव शामिल हो सकता है। यह वर्तमान व्यवस्था से अलग होगा, जहां ये अधिकार उपराज्यपाल के पास होते हैं।
सोनम वांगचुक ने दोहराया कि यह अभी केवल प्रारंभिक प्रस्ताव है और इसके सभी पहलुओं पर आगे बातचीत जारी रहेगी।
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