पर्यटन सीजन में मनाली ट्रैफिक जाम से बेहाल, सड़कों पर लंबी कतारें

मनाली में पर्यटन सीजन अपने चरम पर पहुंचते ही रविवार को भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिला। सुबह से ही चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे समेत मनाली शहर, अटल टनल मार्ग, माल रोड, वशिष्ठ, सोलंगनाला और पलचान क्षेत्रों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई जगह हालात ऐसे रहे कि वाहन घंटों तक रुक-रुककर आगे बढ़ते रहे, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
वीकेंड और छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक मनाली पहुंचे, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सड़क और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हुआ है।
जाम से बिगड़ती स्थिति और पुरानी सड़कें
कसोल और धार्मिक स्थल मणिकर्ण को जोड़ने वाली भुंतर–मणिकर्ण सड़क को डबल लेन करने की योजना लंबे समय से प्रस्तावों में ही अटकी हुई है। हाथीथान से मणिकर्ण तक कई हिस्सों में सड़क अभी भी बेहद संकरी है, जिसके कारण पर्यटन सीजन में बार-बार जाम की स्थिति बन जाती है।
सरसाड़ी, जां, छन्नीखोड़, जरी और कसोल जैसे क्षेत्रों में मार्ग की चौड़ाई कम होने से समस्या और बढ़ जाती है। यह सड़क पार्वती घाटी की 15 से अधिक पंचायतों को जोड़ती है, लेकिन वर्षों से इसके सुधार की मांग लंबित है। 2023 की आपदा में पार्वती नदी के कारण सड़क को गंभीर नुकसान हुआ था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने मरम्मत के लिए करीब 38 करोड़ रुपये की सहायता जारी की थी, लेकिन काम पूरी तरह समय पर पूरा नहीं हो पाया।
पर्यटन पर असर और स्थानीय चिंता
पार्वती घाटी न सिर्फ पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कसोल जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल, मणिकर्ण जैसे धार्मिक केंद्र और मलाणा जैसे ऐतिहासिक गांव के लिए भी जानी जाती है। यहां सालभर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन सीजन शुरू होने के बावजूद सड़क की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है, जिससे यातायात और पर्यटन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
पार्वती घाटी के एक स्थानीय निवासी ने कहा कि सड़क की मरम्मत और टारिंग के लिए बजट स्वीकृत होने के बावजूद काम अधूरा है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यटकों का भी कहना है कि भुंतर से कसोल और मणिकर्ण तक की यात्रा गड्ढों और खराब सड़कों के कारण कठिन हो जाती है, इसलिए प्रशासन को जल्द इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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