'अहंकार विनाश की ओर ले जाता है', उदयनिधि की गिरफ्तारी पर एमके स्टालिन का TVK पर हमला

HIGHLIGHTS
- उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई।
- कई विपक्षी नेताओं ने बयान पर आपत्ति जताई, लेकिन गिरफ्तारी को गैरजरूरी बताया।
- उदयनिधि ने कहा कि वह मामले का कानूनी तरीके से सामना करेंगे और कार्रवाई को ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।
चेन्नई। तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी को लेकर कई राजनीतिक दलों ने प्रतिक्रिया दी है। डीएमके के साथ-साथ उसके विरोधी दलों के नेताओं ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की। हालांकि विपक्षी दलों ने उदयनिधि के बयान को आपत्तिजनक बताया, लेकिन उनका कहना था कि इस मामले में गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं थी।
दूसरी ओर, टीवीके के नेताओं ने उदयनिधि के बयान की आलोचना करते हुए उनकी गिरफ्तारी को उचित ठहराया। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इसे टीवीके सरकार के अहंकार का प्रतीक बताया। उन्होंने बयान जारी कर कहा, "अहंकार हमेशा विनाश की ओर ले जाता है और लगातार बढ़ता अहंकार उस विनाश को और तेज कर देता है। विपक्ष के नेता की गिरफ्तारी का उद्देश्य कावेरी मुद्दे पर सरकार की नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाना था।"
बेटे के समर्थन में उतरे एमके स्टालिन
उदयनिधि की गिरफ्तारी के तुरंत बाद एमके स्टालिन ने चेन्नई स्थित डीएमके मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। इसके बाद जारी बयान में उन्होंने कहा कि उदयनिधि ने अपने भाषण में कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की थी और न ही किसी व्यक्ति का नाम लिया था।
डीएमके अध्यक्ष ने कहा कि कुछ नेताओं ने बिना तथ्यों की जांच किए ही उदयनिधि की आलोचना की, जो केवल ध्यान भटकाने की कोशिश है।
विरोधी दलों की क्या रही प्रतिक्रिया?
एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा कि उदयनिधि को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए था, लेकिन बजट सत्र से ठीक पहले उनकी गिरफ्तारी निंदनीय है।
उन्होंने कहा, "उदयनिधि को अपनी जुबान पर नियंत्रण रखना चाहिए, लेकिन मैं उस डमी हॉर्स सरकार की कड़ी आलोचना करता हूं, जो विपक्ष के नेता की गैरमौजूदगी में बजट सत्र चलाकर विधानसभा को पंगु बनाने की कोशिश कर रही है।"
डीएमडीके महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने इस गिरफ्तारी की तुलना औपनिवेशिक काल के गैगिंग एक्ट से की। वहीं, पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने भी कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को रचनात्मक राजनीति पर ध्यान देना चाहिए।
अंबुमणि रामदास ने कहा, "पुलिस की यह कार्रवाई अनावश्यक और राजनीतिक रूप से प्रेरित थी, खासकर तब जब हाई कोर्ट ने तत्काल गिरफ्तारी नहीं करने की सलाह दी थी।"
वीसीके अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन ने भी बजट सत्र से पहले की गई गिरफ्तारी पर असहमति जताई। उन्होंने कहा, "मुझे समझ नहीं आता कि मद्रास हाई कोर्ट के गिरफ्तारी न करने के निर्देश के बावजूद पुलिस ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई। पुलिस का यह रवैया स्वीकार्य नहीं है।"
उदयनिधि ने क्या कहा?
उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि टीवीके सरकार ने उन्हें डराने और दबाव बनाने के उद्देश्य से यह मामला दर्ज किया है, लेकिन वह इसका कानूनी तरीके से सामना करेंगे।
त्रिची हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाला नहीं हूं।"
उन्होंने कहा, "सरकार ने हाई कोर्ट को बताया था कि मुझे केवल पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जा रहा है, लेकिन इसके लिए 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को लगाया गया और मुझे चेन्नई से तंजावुर इस तरह ले जाया गया जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं। मैं इस मामले का कानूनी रूप से सामना करूंगा।"
अपने विवादित बयान का बचाव करते हुए उदयनिधि ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था। उन्होंने कहा, "कुछ नेताओं ने मेरा पूरा भाषण सुने या समझे बिना ही मेरी आलोचना कर दी।"
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पुलिस कार्रवाई लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश थी। उन्होंने कहा, "तंजावुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान मेरे भाषण को किसानों ने काफी पसंद किया था। इसलिए सरकार झूठे आरोप लगाकर लोगों का ध्यान दूसरी ओर मोड़ना चाहती थी।"
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