मुजफ्फरनगर: मेनका गांधी के बयान पर जैन समाज में आक्रोश, राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के कथित बयान को लेकर जैन समाज में तीखा विरोध देखने को मिल रहा है।
- जैन संतों की परंपरा और ‘पिच्छी’ पर की गई टिप्पणी को लेकर समाज में नाराजगी गहराती जा रही है।
- पहले कानूनी नोटिस भेजने के बाद अब समाज ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।इस मुद्दे पर बुधवार शाम मुजफ्फरनगर के जैन अतिथि भवन में समाज के विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
- बैठक में मौजूद लोगों ने मेनका गांधी के बयान को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहु…
मुजफ्फरनगर में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के कथित बयान को लेकर जैन समाज में तीखा विरोध देखने को मिल रहा है। जैन संतों की परंपरा और ‘पिच्छी’ पर की गई टिप्पणी को लेकर समाज में नाराजगी गहराती जा रही है। पहले कानूनी नोटिस भेजने के बाद अब समाज ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
इस मुद्दे पर बुधवार शाम मुजफ्फरनगर के जैन अतिथि भवन में समाज के विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में मौजूद लोगों ने मेनका गांधी के बयान को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।

जैन एकता मंच की युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव जैन ने कहा कि पिछले कुछ समय से जैन समाज और संत परंपरा को लेकर लगातार विवाद खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी तीर्थ स्थलों को लेकर सवाल उठाए जाते हैं तो कभी संतों पर टिप्पणियां की जाती हैं, और हालिया बयान उसी कड़ी का हिस्सा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जैन संत जिस ‘पिच्छी’ का उपयोग करते हैं, वह मोर के स्वाभाविक रूप से गिरे पंखों से बनाई जाती है और इसका उद्देश्य अहिंसा के सिद्धांत का पालन करते हुए किसी भी जीव को नुकसान से बचाना होता है।
बैठक में आंदोलन की रणनीति भी तय की गई। निर्णय के अनुसार 30 जून को देशभर में सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 7 जुलाई को सभी जैन मंदिरों के बाहर सुबह 9 बजे से 11 बजे तक दो घंटे का शांतिपूर्ण मौन प्रदर्शन किया जाएगा।
इसके बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन भेजा जाएगा। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि सार्वजनिक माफी नहीं मांगी जाती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

अधिवक्ता निपुण जैन ने बताया कि 17 जून को दिल्ली के लाल जैन मंदिर में एक कार्यक्रम के दौरान मेनका गांधी द्वारा जैन संतों और पिच्छी को लेकर की गई टिप्पणी आपत्तिजनक और तथ्यों से परे थी। उन्होंने कहा कि जैन समाज किसी भी रूप में जीव हिंसा का समर्थन नहीं करता।
बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने इसे केवल बयान का विरोध नहीं बल्कि जैन धर्म की परंपराओं और सम्मान की रक्षा का विषय बताया।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.