'मेरी निजी राय: आरएसएस पर प्रतिबंध होना चाहिए'- मल्लिकार्जुन खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को कहा कि उनकी निजी राय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कानून-व्यवस्था से जुड़ी अधिकांश समस्याओं की जड़ भाजपा और आरएसएस की गतिविधियों में है।
सरदार पटेल की जयंती पर प्रधानमंत्री को दिया जवाब
खरगे ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर कांग्रेस पर निशाना साधा था। पलटवार करते हुए खरगे ने कहा कि सरदार पटेल स्वयं भी 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस के रुख की आलोचना कर चुके थे।
‘आयरन मैन’ और ‘आयरन लेडी’ के योगदान को किया याद
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 31 अक्तूबर का दिन दो महान नेताओं की याद का दिन है— सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि। उन्होंने कहा कि “एक लौह पुरुष और एक लौह महिला, दोनों ने देश की एकता और अखंडता बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।”
श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे पटेल के पत्र का हवाला
खरगे ने सरदार पटेल द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस पत्र में पटेल ने स्पष्ट किया था कि आरएसएस ने उस समय देश में ऐसा माहौल बनाया, जिसने गांधीजी की हत्या जैसी त्रासदी को संभव बनाया।
नेहरू और पटेल के संबंधों पर दिया बयान
भाजपा की उस कोशिश पर प्रतिक्रिया देते हुए जिसमें वह नेहरू और पटेल के बीच मतभेद दिखाने का प्रयास करती है, खरगे ने कहा कि “वास्तव में दोनों एक-दूसरे का गहरा सम्मान करते थे। नेहरू ने देश की एकता के लिए पटेल की भूमिका की सराहना की थी, वहीं पटेल ने नेहरू को राष्ट्र का आदर्श नेता कहा था।”
मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया
खरगे की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि “सरदार पटेल जम्मू-कश्मीर को भी भारत में शामिल करना चाहते थे, लेकिन नेहरू ने ऐसा नहीं होने दिया।” प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि कांग्रेस अब भी औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त नहीं हो पाई है।
सरदार पटेल का योगदान
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 1875 में गुजरात के नाडियाड में हुआ था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे और रियासतों के एकीकरण में उनके योगदान के कारण उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है। उनका निधन 1950 में हुआ था।
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