नीट-यूजी 2026 पेपर लीक केस: शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ी

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई के दौरान आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत को 15 जून तक बढ़ाने का आदेश दिया। पिछली न्यायिक हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया था।
वाघमारे की जमानत पर फैसला सुरक्षित
इसी मामले में सह-आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर भी सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला 9 जून के लिए सुरक्षित रख लिया है। सीबीआई ने वाघमारे की जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए उन्हें कथित तौर पर पूरे षड्यंत्र की प्रमुख भूमिका निभाने वाली बताया है।
सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलें
विशेष सीबीआई न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में सुनवाई के दौरान वाघमारे की ओर से अधिवक्ता श्रेयस गच्छे और सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अपने-अपने पक्ष रखे।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे ने सेवानिवृत्त रसायन शास्त्र शिक्षक प्रह्लाद कुलकर्णी और पुणे निवासी धनंजय लोखंडे के साथ मिलकर कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र हासिल किया और उसे आगे अन्य लोगों तक पहुंचाया।
जांच एजेंसी के अनुसार बैंक लेन-देन और छात्रों के बयानों से यह संकेत मिले हैं कि परीक्षा सामग्री तक पहुंच के बदले धन का लेन-देन हुआ था। सीबीआई का दावा है कि धनंजय लोखंडे ने यह प्रश्नपत्र मनीषा वाघमारे से प्राप्त किया, जिसे आगे शुभम खैरनार तक पहुंचाया गया।
वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मनीषा वाघमारे एक शैक्षणिक सलाहकार हैं और उनकी आय छात्रों को विभिन्न संस्थानों में एडमिशन दिलाने पर मिलने वाले कमीशन से होती है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि तलाशी के दौरान उनके घर से कोई नकदी या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
सुनवाई के दौरान वकील ने वाघमारे की स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए बताया कि वह वर्टिगो से पीड़ित हैं और हाल ही में अस्पताल में भर्ती रही थीं। इस पर अदालत ने कहा कि जेल अस्पताल में ऐसे मामलों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है और उचित आवेदन दाखिल किया जा सकता है।
सीबीआई ने अदालत से कहा कि मामले की गहराई से जांच और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए आरोपियों की हिरासत आवश्यक है।
परीक्षा से जुड़ी पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी, जिसमें 22 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया था। पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
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