राजस्थान: श्रीगंगानगर में नकली कॉम्बैट यूनिफॉर्म रैकेट का भंडाफोड़, 1000 मीटर कपड़ा जब्त
By Hitesh — August 1, 2026

HIGHLIGHTS
- संयुक्त कार्रवाई में कई दुकानों की जांच कर संदिग्ध सैन्य सामग्री को कब्जे में लिया गया।
- सुरक्षा एजेंसियां प्रतिबंधित कपड़े की सप्लाई चेन और उससे जुड़े लोगों का पता लगा रही हैं।
- अधिकारियों ने सैन्य वर्दी के गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए सतर्कता बढ़ाई है।
Author: — Dainik Dehat
पाकिस्तान सीमा से सटे संवेदनशील जिले श्रीगंगानगर में आर्मी इंटेलिजेंस की सूचना पर पुलिस ने सेना की नई डिजिटल पैटर्न कॉम्बैट यूनिफॉर्म से मिलते-जुलते नकली कपड़ों की अवैध बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। संयुक्त छापेमारी के दौरान सेना की कॉम्बैट यूनिफॉर्म जैसा कपड़ा, जूते, फीते, टोपी और अन्य सैन्य सामग्री बरामद की गई है। शुरुआती कार्रवाई में प्रतिबंधित पैटर्न वाले 1000 मीटर से अधिक कपड़े को जब्त किया गया है।
15 अगस्त से पहले कई दुकानों पर छापेमारी
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोकने के उद्देश्य से कोतवाली पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस ने रेलवे स्टेशन रोड स्थित करीब एक दर्जन दुकानों पर संयुक्त कार्रवाई की।
अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
आर्मी इंटेलिजेंस की सूचना पर खुलासा
कोतवाली थाना प्रभारी तेजवंत सिंह बराड़ ने बताया कि आर्मी इंटेलिजेंस से लगातार जानकारी मिल रही थी कि शहर की कई दुकानों पर सेना की डिजिटल पैटर्न वाली कॉम्बैट यूनिफॉर्म से मिलता-जुलता प्रतिबंधित कपड़ा बेचा जा रहा है।
सूचना के आधार पर पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की। मामले की जांच अभी जारी है।
इन दुकानों पर हुई कार्रवाई
संयुक्त कार्रवाई के दौरान अपना आर्मी टेलर्स, जय भोले आर्मी स्टोर, आरडी आर्मी स्टोर, पंजाबी आर्मी टेलर्स, चरण आर्मी टेलर, श्री प्रयाग आर्मी स्टोर, कुक्कड़ आर्मी स्टोर, राज आर्मी स्टोर और जेएमडी आर्मी टेलर समेत कई दुकानों की जांच की गई।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि यह प्रतिबंधित सामान कहां-कहां सप्लाई किया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों ने जताई दुरुपयोग की आशंका
आर्मी इंटेलिजेंस के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान सीमा से जुड़े इस संवेदनशील क्षेत्र में प्रतिबंधित सैन्य वर्दी की बिक्री सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चुनौती बन सकती है।
एजेंसियों का कहना है कि सेना जैसी दिखने वाली वर्दी गलत लोगों के हाथ लगने पर इसका इस्तेमाल घुसपैठ या अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है। इसी वजह से इस पैटर्न की वर्दी की खुली बिक्री पर रोक लगाई गई है।
बिना लाइसेंस चल रहा था कारोबार
जांच में सामने आया है कि प्रतिबंधित पैटर्न वाला कपड़ा दिल्ली के आजाद नगर स्थित महालक्ष्मी मार्केट से लाया जा रहा था। वहां बड़ी संख्या में सेना की ड्रेस के कपड़े बेचने वाली दुकानें हैं।
श्रीगंगानगर में जिन दुकानदारों के यहां कार्रवाई की गई, उनके पास इस प्रतिबंधित पैटर्न के कपड़े बेचने का वैध लाइसेंस नहीं मिला।
रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2023 में लागू नई डिजिटल कैमोफ्लेज यूनिफॉर्म के डिजाइन का इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) पंजीकरण कराया हुआ है और इसकी खुले तौर पर बिक्री पर रोक है। इसके बावजूद जारी अवैध कारोबार को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी सप्लाई चेन की जांच में जुटी हैं।
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