नोएडा: ख़तरनाक साजिश के गुनहगारों को हरगिज़ न बख्शियें

13 अप्रैल 2026 को गौतमबुद्धनगर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रमिक असंतोष की आड़ लेकर पूरे इलाके को बंधक बनाकर उसे आग की लपटों में तब्दील कर दिया गया। अगले दिन यानी 14 अप्रैल को भी श्रमिकों ने पत्थरबाजी, हिंसा और आगजनी जारी रखी। फ़ेज-2 में पथराव के साथ साथ वाहनों को तोड़ा फोड़ा गया। महिला पुलिस को ला रही पुलिस के वाहन (बस) को पलट कर, पेट्रोल छिड़क उसे आग के हवाले कर दिया गया। यह सब तब हुआ जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह चुके थे कि सरकार श्रमिकों के साथ है। तुरता-फुरती से उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई। मजदूरों की वेतन वृद्धि व ओवरटाइम दुगुना कर दिया। श्रमिकों की अन्य मांगों पर कमेटी विचार करने को तैयार है।
नोएडा की श्रमिक अशांति के दौरान 350 से अधिक फैक्ट्रियां, 150 से अधिक वाहन फूंक डाले गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 3000 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट की गई। यह आंकड़ा और बढ़ने का अनुमान है। पुलिस की सख्ती के बाद अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। नोएडा की स्थिति संभालने में पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह स्वयं लगी है।
जिस प्रकार से नोएडा की नाकेबंदी कर, उसे बंधक बना कर गली गली में गुरिल्ला युद्ध लड़ा गया, हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट की गई, बवाल होने पर संयम व शांति बरतने की अपील करने के बजाय सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग लिया। कहा कि नोएडा नहीं संभला, यूपी क्या संभालेंगे। दूसरी ओर कांग्रेस के मीडिया सैल प्रभारी मीर इलियास की पोस्ट पकड़ी गई जिसमें इलियास ने फेक न्यूज डाली कि पुलिस ने मजदूरों पर फायरिंग कर 14 मजदूर मार डालें। 30 से अधिक गंभीर रूप से घायल है। इलियास के अलावा 59 सोशल मीडिया ग्रुप बना कर मजदूरों को हिंसा, आगजनी के लिए उकसाया गया।
नोएडा की श्रमिक अशांति फैलाने वाले गैर श्रमिक नेताओं की हरकतें यहीं तक सीमित नहीं थीं। हरियाणा के फरीदाबाद तथा पलवल की फैक्ट्रियों को फूंकने की कोशिश में आकाश, हरिश्चन्द्र, पिंटू कुमार, रानू सिंह, श्यामवीर तथा अजीत सिंह 13 अप्रैल को गिरफ्तार किये गए। इनमें एक भी मज़दूर नहीं है। फर्जी श्रमिक बनकर आंदोलन में घुसे थे। एक बड़े राजनीतिक दल आरजेडी से जुड़े हैं तार।
नोएडा में सोची-समझी साजिश के तहत इतना बड़ा कांड हुआ। जब 4-5 दिनों से मजदूर हड़ताल पर थे, प्रदर्शन कर रहे थे, तब जिला प्रशासन क्यों सोया था। एलआईयू को साजिश की भनक क्यों नहीं लगी? हर हादसे या बड़े काण्ड के बाद ही शासन प्रशासन क्यों जागता है? अपराधी क्यों कानून के शिकंजे से बाहर रह जाते हैं। निजी तथा सार्वजनिक संपत्तियां फूकने वालों पर न्यायपालिका क्यों कृपा निधान हो जाती है?
किसी ने नोएडा को फूंकने की देशद्रोही हरकत में पाकिस्तान का हाथ होने की आशंका जताई है। इस प्रकार के बेतुके औचित्यहीन वक्तव्य जांच को गलत दिशा में मोड़ सकते हैं। नोएडा कांड असाधारण और आंखे खोलने वाली साजिश की ओर खतरनाक संदेश है, उत्तर प्रदेश विधानसभा तथा लोकसभा चुनाव तक केन्द्र व राज्य सरकारों को आंख कान खुले रखने होंगे। आगे खतरे ही खतरे हैं। गुप्तचर विभाग को सक्रिय सतर्क रखने की महती आवश्यकता है। नोएडा के अपराधी किसी हाल में बख्शे नहीं जाने चाहिएं।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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