अजीत पवार के यूं चले जाने पर..

वे महाराष्ट्र के नहीं राष्ट्र के नेता थे। आज जब बारामती में उनके अंतिम संस्कार में अमित शाह, नितिन गडकरी, शरद पवार, सुप्रिया सुले, नितिन नबीन और महाराष्ट्र के तमाम नेताओं को रंजीदा हालत में देखते हैं और अजीत पवार की 90 वर्षीया मां के गम भरे चेहरे पर नज़र पड़ती है (टी.वी स्क्रीन पर) तो विमान हादसे पर और अजीत पवार की आकस्मिक दुःखद मृत्यु पर आंतरिक वेदना महसूस हो रही है। 'देहात' परिवार बारामती विमान हादसे के सभी मृतकों की दुःखद मृत्यु पर दुख एवं शोक प्रकट करता है।
अजीत पवार के चाचा और मराठवाड़ा के दिग्गज नेता शरद पवार ने कहा है कि यह अपूरणीय क्षति है लेकिन इस दुःखदाई हादसे में राजनीति तलाशने की कोशिश न करें, लेकिन हर घटना को दुर्घटना बता देने वाले और मौके पर अवसर तलाशने वाले, कूड़ेदान में फेंक दिये जाने वाले, ऐरे-गैरे, नत्थू-खैरे नेता ही नहीं, ममता बनर्जी, दिग्विजय तथा मुलायम सिंह यादव के लख्तरे जिगर रहे अखिलेश यादव को विमान दुर्घटना में षडयंत्र की बास आ रही है। इन्होंने जो कुछ कहा, वह इनकी कलुषित मानसिकता और इनके बौनेपन को उजागर करता है।
राष्ट्र जानता है कौन है ममता बनर्जी? वहीं जिन से गोवंश तस्करी, कोयला-राशन घोटालों विरोधियों के घरों और दफ्तरों में आग लगवाने, हत्या कर तालाब में फेंकने जैसी खूनी कहानियों से जिनकी जिन्दगी के पृष्ठ रंगे हुए हैं। वे अब हादसे में साजिश देख रही हैं। बारामती से कोलकाता की दूरी 1800 किलोमीटर है लेकिन दीदी की दूरदृष्टी तो संजय जैसी लगी।
ये दिग्विजय सिंह वे ही हैं जिन्होंने मुम्बई हमले का ठीकरा कसाब पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सिर फोड़ 'हिन्दू आतंकवाद' का आविष्कार किया था।
और जिन्होंने अपने पिता को जीते जी पार्टी से अपदस्थ कर दिया, जिनका दल माफियाओं की ब्रांडेड पार्टी के रूप में जाना जाता है, हादसे की खोजबीन में उनके कथन को कौन वजन देगा।
ये सब जानते हैं कि विमान हादसे की जांच की परंपरा है, यह भी जानते हैं कि ये झूठे साबित होंगे, लेकिन झूठ बोलने की आदत है तो झूठ ही बोलेंगे।
गोविंद वर्मा
(संपादक 'देहात')
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