आर्थिक दबाव में पाकिस्तान, चीन के लड़ाकू विमानों की बिक्री से जुटा रहा पैसा

इस्लामाबाद। गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अब विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए रक्षा सौदों का सहारा ले रहा है। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर उसके जेएफ-17 लड़ाकू विमान को तीसरे देशों को बेच रहा है। अब तक नौ देशों से इस विमान को लेकर समझौते किए जा चुके हैं, जिनमें कई इस्लामिक देश भी शामिल हैं।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पास कामरा में चीन और पाकिस्तान की एक संयुक्त उत्पादन इकाई काम कर रही है, जहां इन लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन और पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स के बीच साझेदारी से संचालित है।
‘ऑलवेज ब्रदर’ साझेदारी के तहत उत्पादन
इस चीन-पाक सहयोग को अनौपचारिक रूप से ‘ऑलवेज ब्रदर डील’ कहा जा रहा है। इस परियोजना में चीन के सैकड़ों एयरोनॉटिकल इंजीनियर काम कर रहे हैं।
लक्ष्य करीब 200 लड़ाकू विमान तैयार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचना है, जिसमें होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा चीन को और शेष पाकिस्तान को मिलेगा।
इन देशों तक पहुंचा जेएफ-17
पाकिस्तान अब तक सऊदी अरब, नाइजीरिया, अजरबैजान, लीबिया, मोरक्को, इंडोनेशिया, इथियोपिया और सूडान सहित कुल नौ देशों के साथ जेएफ-17 की बिक्री को लेकर समझौते कर चुका है। इन सौदों के जरिए पाकिस्तान खुद को एक रक्षा निर्यातक के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है।
कर्ज चुकाने की कोशिश
पाकिस्तान इन सौदों से मिली रकम का इस्तेमाल अपने विदेशी कर्ज को घटाने में कर रहा है। खासतौर पर सऊदी अरब से लिए गए बड़े कर्ज को चुकाने के लिए यह रणनीति अपनाई जा रही है। बताया जा रहा है कि फाइटर जेट सौदों से अब तक पाकिस्तान ने हजारों करोड़ रुपये की देनदारी कम कर ली है।
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