अमेरिका में फिर आंशिक शटडाउन, बजट पर सहमति न बनने से सरकारी कामकाज प्रभावित

पिछले साल नवंबर में अमेरिका को अपने इतिहास के सबसे लंबे सरकारी शटडाउन से राहत मिली थी, लेकिन कुछ ही महीनों के भीतर देश एक बार फिर वित्तीय संकट की स्थिति में पहुंच गया है। 31 जनवरी से अमेरिका में आंशिक सरकारी बंदी लागू हो गई, क्योंकि सांसद 30 जनवरी की तय समय सीमा तक जरूरी फंडिंग बिल पारित नहीं कर सके।
हालांकि यह साफ नहीं है कि यह स्थिति कितने दिनों तक बनी रहेगी, लेकिन सीनेट, व्हाइट हाउस और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच हाल में बनी सहमति की रफ्तार को देखते हुए माना जा रहा है कि यह बंदी लंबे समय तक नहीं खिंचेगी।
डीएचएस और आईसीई को लेकर टकराव बना बड़ी वजह
सीनेट ने शुक्रवार शाम एक खर्च विधेयक को मंजूरी दी, जिसके तहत गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) को दो सप्ताह के लिए अस्थायी फंड दिया गया है। इसी अवधि में आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) से जुड़े सुधारों पर बातचीत जारी रहेगी। इसके अलावा अन्य संघीय विभागों को सितंबर तक के लिए बजट देने का भी प्रावधान किया गया है।
डीएचएस और आईसीई हाल ही में मिनियापोलिस में हुए गोलीकांड के बाद विवादों में आ गए हैं, जहां संघीय आव्रजन एजेंटों की कार्रवाई में दो नागरिकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद डेमोक्रेटिक सांसदों ने इन एजेंसियों के कामकाज और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोमवार को प्रतिनिधि सभा में होगा फैसला
अब यह विधेयक प्रतिनिधि सभा के सामने पेश किया जाएगा, जो इस समय अवकाश पर है। सदन के रिपब्लिकन स्पीकर माइक जॉनसन ने संकेत दिए हैं कि सोमवार को इस पर मतदान कराया जा सकता है।
यह स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल अमेरिका में पूर्ण शटडाउन नहीं है, बल्कि आंशिक बंदी लागू हुई है। कुछ सरकारी विभाग और सेवाएं काम करती रहेंगी, जबकि कुछ एजेंसियों की गतिविधियां अस्थायी रूप से रुक सकती हैं।
आखिर विवाद किस बात पर है?
असल टकराव डीएचएस और उसके अंतर्गत आने वाली एजेंसियों—आईसीई और बॉर्डर पेट्रोल—के संचालन को लेकर है। मिनियापोलिस की घटना के बाद डेमोक्रेट सांसद चाहते हैं कि इन एजेंसियों पर सख्त निगरानी, जवाबदेही और सुधार लागू किए जाएं। उनका कहना है कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक वे इन विभागों को पूरा बजट देने के पक्ष में नहीं हैं।
शटडाउन का आम असर
सरकारी खर्च रुकने से कई विभागों की सेवाएं सीमित हो सकती हैं। कुछ कर्मचारियों को अस्थायी छुट्टी पर भेजा जा सकता है, जबकि कई लोगों को बिना वेतन के काम रोकना पड़ सकता है। सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां आवश्यक सेवाएं जारी रखेंगी, लेकिन प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ना तय है।
फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि यह आंशिक शटडाउन पिछली बार की तरह लंबा नहीं चलेगा, क्योंकि सीनेट का प्रस्ताव जल्द ही प्रतिनिधि सभा के सामने आने वाला है।
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