दिल्ली में प्रदूषण का कहर, 20 इलाकों में AQI 400 पार; जहांगीरपुरी सबसे प्रदूषित

HIGHLIGHTS
- जहांगीरपुरी में सबसे ज्यादा 454 एक्यूआई रहा।
- पंजाबी बाग में AQI 448 और रोहिणी व आईआईटी दिल्ली में 442 दर्ज किया गया।
- राजधानी के 35 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 301 से 400 के बीच रहा।
वहीं, राजधानी के 35 निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई 301 से 400 के बीच रहा, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। इसके अलावा चार केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 201 से 300 के बीच दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि दिल्ली के किसी भी निगरानी केंद्र पर हवा की गुणवत्ता मध्यम या उससे बेहतर श्रेणी में नहीं रही।
राजधानी में सबसे कम एक्यूआई आईएमडी लोदी रोड पर 277 दर्ज किया गया। दिल्ली कैंट में यह 281, टिकरी कलां में 294 और एनएसआईटी द्वारका में 297 रहा।
जहांगीरपुरी के बाद इन इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर गंभीर
दिल्ली के कई अन्य इलाकों में भी वायु प्रदूषण गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। नरेला में एक्यूआई 430, विवेक विहार में 429, अलीपुर में 424, मुंडका में 415 और बवाना में 407 रहा। वहीं, आईटीओ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 402 दर्ज किया गया।
इसके अलावा आनंद विहार में एक्यूआई 334 और चांदनी चौक में 354 रहा। इन आंकड़ों से साफ है कि राजधानी के ज्यादातर इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है।
कई निगरानी केंद्रों पर PM 2.5 बना प्रमुख प्रदूषक
सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक के रूप में सामने आया। जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में भी पीएम 2.5 का स्तर प्रमुख रहा। वहीं, आईआईटी दिल्ली और दिल्ली कैंट समेत कुछ निगरानी केंद्रों पर पीएम 10 प्रमुख प्रदूषक के तौर पर दर्ज किया गया।
सीपीसीबी के मुताबिक, एक्यूआई 301 से 400 के बीच रहने पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। वहीं, 401 से 500 के बीच का एक्यूआई स्वस्थ लोगों की सेहत पर भी असर डाल सकता है। खासतौर पर फेफड़ों और दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक हो सकती है।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण की चादर और गहराने की आशंका
मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का संकट आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। आठ नवंबर को प्रदूषकों को हवा के साथ दूर ले जाने वाली मौसमी परिस्थितियां कमजोर पड़ने का अनुमान है। ऐसे में दिवाली के दौरान पटाखे जलाए जाने से दिल्ली-एनसीआर की हवा में प्रदूषण की परत और मोटी हो सकती है।
आईआईटीएम के अनुसार, शुक्रवार शाम से ही हवाओं की रफ्तार कम होने की संभावना है। इससे वातावरण में मौजूद प्रदूषकों का फैलाव प्रभावित हो सकता है और प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।
हवा की रफ्तार में कमी से बढ़ेगा प्रदूषण
प्रदूषण बढ़ने के पीछे हवा की धीमी गति और प्रदूषकों को फैलने से रोकने वाली प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
अनुमान के मुताबिक, छह और सात नवंबर को दोपहर के समय हवा की रफ्तार 15 से 18 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। हालांकि, शाम और रात के समय इसकी गति घटकर करीब पांच किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।
आठ नवंबर को मौसम की स्थिति और प्रतिकूल हो सकती है। इस दिन सुबह हवा की गति आठ, दोपहर में 10 और शाम-रात के समय 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है। इसके साथ ही हवा की दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पूर्व और फिर पूर्व की ओर बदल सकती है।
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