रांची: JPSC-JSSC विवाद पर छात्रों का आंदोलन तेज, मोबाइल फ्लैशलाइट से किया प्रदर्शन

HIGHLIGHTS
- छात्रों ने परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल का लाइसेंस रद्द करने की मांग उठाई।
- छात्र नेताओं ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा है।
- 10 अगस्त को रांची में विधानसभा घेराव करने की घोषणा की गई है।
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अभ्यर्थियों और छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। सोमवार को आंदोलन के दसवें दिन छात्रों ने अलग तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। शाम करीब सात बजे हजारों छात्रों ने अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्र हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाते नजर आए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को दोहराया।
CBI जांच और एजेंसी पर कार्रवाई की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों ने जेपीएससी और जेएसएससी की सभी विवादित परीक्षाओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। इसके अलावा परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीडीपीएल का लाइसेंस रद्द करने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता के बिना युवाओं को न्याय नहीं मिल सकता।
छात्र नेताओं ने रखा पक्ष
फ्लैशलाइट प्रदर्शन के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में छात्र नेताओं रविंद्र पासवान और पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से ही संभव है।
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि सीआईडी जांच के नाम पर कई निर्दोष शिक्षकों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में स्वतंत्र और व्यापक जांच की जरूरत है।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान
छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर है।
उन्होंने राज्य के सभी अभ्यर्थियों और युवाओं से 10 अगस्त को बड़ी संख्या में रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचने की अपील की है। इसके बाद विधानसभा घेराव कर अपनी एकजुटता और लोकतांत्रिक शक्ति दिखाने की घोषणा की गई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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