सरकारी खजाने को राहत, प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹18.38 लाख करोड़ के पार

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरकार की कर वसूली में अब तक संतुलित बढ़त देखने को मिली है। आयकर विभाग द्वारा जारी ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, 11 जनवरी तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 8.82 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 18.38 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है।
यह आंकड़ा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे चालू वित्त वर्ष के बजटीय लक्ष्यों की दिशा में प्रगति का संकेत मिलता है। हालांकि, कर संग्रह की इस मजबूती में रिफंड के अपेक्षाकृत कम वितरण का भी योगदान रहा है।
व्यक्तिगत करदाताओं ने कंपनियों को छोड़ा पीछे
ताज़ा आँकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि इस बार व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) की हिस्सेदारी कॉरपोरेट टैक्स से अधिक रही है।
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नॉन-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह: व्यक्तियों और HUF से कुल 9.30 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
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कॉरपोरेट टैक्स संग्रह: कंपनियों से शुद्ध रूप से 8.63 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई।
यह रुझान दर्शाता है कि आयकर अनुपालन में सुधार हुआ है और संगठित रोजगार तथा वेतनभोगी वर्ग की भूमिका अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूत हो रही है।
टैक्स रिफंड में कमी से शुद्ध संग्रह को सहारा
आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 11 जनवरी की अवधि में टैक्स रिफंड जारी करने में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान कुल 3.12 लाख करोड़ रुपये के रिफंड दिए गए।
यदि रिफंड से पहले के सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह की बात करें तो इसमें 4.14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह करीब 21.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
शेयर बाजार से भी बढ़ा सरकारी राजस्व
शेयर बाजार में निवेश गतिविधियों का असर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) के आंकड़ों में भी नजर आया है। समीक्षा अवधि में STT से सरकार को 44,867 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है। हालांकि, यह पूरे साल के अनुमान से अभी काफी पीछे है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने STT से 78,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है, जिसकी पूर्ति शेष महीनों में बाजार की चाल पर निर्भर करेगी।
आगे की चुनौती और बजट पर नजर
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए प्रत्यक्ष करों से कुल 25.20 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 12.7 प्रतिशत अधिक है। मौजूदा 8.82 प्रतिशत की वृद्धि दर यह संकेत देती है कि लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले महीनों में संग्रह की रफ्तार बढ़ानी होगी।
अब तक का कर संग्रह यह बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे औपचारिक ढांचे की ओर बढ़ रही है और टैक्स बेस का विस्तार हो रहा है। हालांकि, रिफंड में गिरावट और सकल संग्रह की सीमित बढ़त ऐसे बिंदु हैं, जिन पर नीति-निर्माताओं की नजर बनी रहेगी। 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट से पहले ये आंकड़े सरकार को राजस्व की वास्तविक तस्वीर समझने में मदद करेंगे।
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