आत्मनिर्भरता ही भारत का आर्थिक सुरक्षा कवच: शक्तिकांत दास

नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद और टैरिफ के दबाव के बीच, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि भारत अब ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। बिबेक देबरॉय मेमोरियल लेक्चर को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार की नीतियों और सुधारों के चलते भारत 'अतुल्य भारत' से 'विश्वसनीय भारत' बनने की ओर अग्रसर है।
आत्मनिर्भरता का अर्थ
शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्वीकरण को लेकर पिछले दशकों की आम सहमति अब कमजोर पड़ चुकी है और बहुपक्षीय सहयोग मुश्किल हो गया है। ऐसे माहौल में भारत ने 'आत्मनिर्भरता' को अपनी नीति का मूल आधार बनाया है। उन्होंने इसके दो पहलुओं पर जोर दिया:
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रणनीतिक लचीलापन: इसका मतलब दुनिया से कटना नहीं, बल्कि देश की मुख्य क्षमताओं और लचीलेपन को मजबूत करना है।
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घरेलू उत्पादन क्षमता: महत्वपूर्ण वस्तुओं और तकनीकों का उत्पादन देश में विकसित करना और विदेशी निर्भरता कम करना।
दास ने कहा कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था भारत को विकास की निरंतरता बनाए रखने की शक्ति देती है, जबकि मजबूत और स्वतंत्र विदेश नीति राष्ट्रीय हितों की रक्षा करती है।
वैश्विक चुनौतियों पर दृष्टि
दास ने यह भी बताया कि दुनिया के आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य में कई बदलाव हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका 'रूसी तेल पर प्रतिबंध' पर विचार कर रहा है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है, जिनमें भारत भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियां कई रूप में सामने आती हैं:
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बहुपक्षवाद पर दबाव: पारंपरिक बहुपक्षीय प्रणाली कमजोर हो रही है।
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अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की सीमाएं: प्रमुख संस्थान अपने मूल उद्देश्यों को पूरा करने में संघर्षरत हैं।
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व्यापार को हथियार के रूप में इस्तेमाल: आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर वैश्विक नेटवर्क को विभाजित किया जा रहा है।
भारत की तैयारियां और आश्वासन
सभी चुनौतियों के बावजूद दास ने भरोसा जताया कि भारत कोविड-19 के बाद से कई वैश्विक झटकों से सफलतापूर्वक उभर चुका है। उन्होंने कहा, "देश ने जो नीतियां अपनाई हैं, उनके साथ हवा हमारे पक्ष में है। हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं।"
दास ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनौतियां आती रहेंगी, लेकिन भारत अपनी नीति में दृढ़ है। देश एक नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करता है, वहीं अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से रणनीतिक साझेदारी भी बना रहा है।
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