सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद, प्रमुख शेयरों में बिकवाली

साल के आखिरी कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव भरी रही। वैश्विक बाजारों से साफ दिशा न मिलने और वर्ष के अंत में मुनाफावसूली बढ़ने के कारण घरेलू शेयर सूचकांक लगातार चौथे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। कमजोरी का असर शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डॉलर के मुकाबले रुपया भी फिसलकर लगभग 90 के स्तर के करीब पहुंच गया।
26,000 के नीचे फिसला निफ्टी
सोमवार को बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 345 अंक से ज्यादा टूटकर 84,695 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी करीब 100 अंक गिरकर 25,942 पर आ गया। इस गिरावट के साथ निफ्टी 26,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया, जिसे अल्पकालिक कमजोरी का संकेत माना जा रहा है।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में अदाणी पोर्ट्स, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। दूसरी ओर टाटा स्टील, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर और इटरनल जैसे शेयरों में सीमित बढ़त दर्ज की गई।
आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों ने खींचा बाजार नीचे
बाजार पर सबसे ज्यादा असर दिग्गज आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों की कमजोरी का रहा। निफ्टी-50 में एचसीएल टेक और अदाणी पोर्ट्स करीब दो-दो प्रतिशत टूटकर प्रमुख नुकसान उठाने वालों में शामिल रहे। अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण आईटी सेक्टर में बिकवाली दिखी। वहीं पोर्ट सेक्टर में वॉल्यूम को लेकर चिंता और तकनीकी सुधार के चलते दबाव बना रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे भारी भरकम शेयरों में भी सुस्ती रही।
रुपया 90 के स्तर के करीब
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया और कमजोर हुआ। डॉलर के मुकाबले यह करीब 8 पैसे टूटकर 89.98 के आसपास बंद हुआ। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने रुपये पर दबाव बनाए रखा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपया 90 का स्तर पार करता है, तो आयातित महंगाई का खतरा बढ़ सकता है।
बाजार पर क्या कहते हैं जानकार
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, फिलहाल बाजार में तेजी को आगे बढ़ाने वाले ठोस कारक नजर नहीं आ रहे हैं। छुट्टियों के मौसम के कारण निवेशकों की सक्रियता भी सीमित है, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में समेकन का दौर रह सकता है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा कि बाजार की धारणा वैश्विक संकेतों और चुनिंदा शेयरों से जुड़ी खबरों पर निर्भर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि कारोबार का वॉल्यूम कम रहा और निवेशकों ने व्यापक खरीदारी के बजाय चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाया।
वैश्विक बाजारों का हाल
एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक दो प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा, जबकि शंघाई का कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहे। यूरोपीय बाजारों में भी ज्यादातर सूचकांक कमजोर कारोबार करते नजर आए।
एफआईआई बिकवाल, डीआईआई खरीदार
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को करीब 317 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1,773 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इस बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 1.7 प्रतिशत की तेजी आई और यह 61.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
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