तमिलनाडु सरकार में विभागों का बंटवारा, जानें सीएम विजय के पास कौन से मंत्रालय

HIGHLIGHTS
- तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद शनिवार को मंत्रिमंडल के विभागों का औपचारिक बंटवारा कर दिया गया।
- राज्य सरकार की ओर से जारी सूची में मुख्यमंत्री सी.
- जोसेफ विजय सहित कुल 10 मंत्रियों को विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- इससे पहले 10 मई को टीवीके प्रमुख और अभिनेता से नेता बने सी.
- जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
- मंत्रिमंडल में सबसे अधिक विभाग मुख्यमंत्री विजय ने अपने पास रखे हैं।
तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद शनिवार को मंत्रिमंडल के विभागों का औपचारिक बंटवारा कर दिया गया। राज्य सरकार की ओर से जारी सूची में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सहित कुल 10 मंत्रियों को विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले 10 मई को टीवीके प्रमुख और अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
मंत्रिमंडल में सबसे अधिक विभाग मुख्यमंत्री विजय ने अपने पास रखे हैं। उनके पास सामान्य प्रशासन, गृह, पुलिस, राजस्व, विशेष कार्यक्रम क्रियान्वयन, महिला एवं बाल कल्याण, युवा कल्याण, नगर प्रशासन, शहरी विकास, जल आपूर्ति सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रहेगी।
इसके अलावा मंत्रियों के बीच अन्य विभागों का भी बंटवारा किया गया है—
एन. आनंद को ग्रामीण विकास और जल संसाधन विभाग मिला है।
आधव अर्जुना को लोक निर्माण और खेल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
डॉ. के.जी. अरुणराज को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग सौंपा गया है।
के.ए. सेंगोट्टैयन को वित्त मंत्रालय दिया गया है।
पी. वेंकटरामनन को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग मिला है।
आर. निर्मलकुमार को ऊर्जा संसाधन और कानून विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
राजमोहन को स्कूल शिक्षा, तमिल विकास और जनसंपर्क विभाग सौंपा गया है।
डॉ. टी.के. प्रभु को प्राकृतिक संसाधन विभाग दिया गया है।
सेल्वी एस. कीर्तनाः को उद्योग विभाग की जिम्मेदारी मिली है।
गौरतलब है कि हाल ही में विधानसभा में टीवीके सरकार ने 140 से अधिक विधायकों के समर्थन के साथ विश्वास मत हासिल किया था। पार्टी राज्य में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, हालांकि वह पूर्ण बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री विजय ने विभिन्न छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों से समर्थन की अपील की थी। इस प्रक्रिया में आईयूएमएल, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस और एआईएडीएमके के कुछ बागी विधायकों ने भी समर्थन दिया, जिसके बाद सरकार ने बहुमत साबित कर लिया।
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