बाम्बे हाउस में टाटा ट्रस्ट बोर्ड मीटिंग समाप्त, ट्रस्टियों और फंडिंग को लेकर उठे सवाल

टाटा ट्रस्ट के बोर्ड की बैठक 10 अक्टूबर को समूह के मुख्यालय बाम्बे हाउस में दोपहर तक चली। बैठक में कुछ सदस्य व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि अन्य वीडियो कॉल के जरिए जुड़े। सूत्रों के अनुसार, बैठक में ट्रस्ट प्रशासन के संचालन, फंडिंग और नियमों के पालन की समीक्षा की गई। हालांकि ट्रस्टियों की नियुक्ति या उनके कार्यकाल को लेकर कोई विशेष निर्णय नहीं लिया गया।
मुख्य चर्चा का केंद्र टाटा ट्रस्ट को हाल ही में टाटा संस से लाभांश के रूप में मिले 1,700 करोड़ रुपये का परोपकार क्षेत्र में उपयोग रहा। बैठक के दौरान ट्रस्टियों के बीच तनाव देखा गया और संतुलन बनाए रखने के प्रयास किए गए। सूत्रों का कहना है कि यह बैठक सरकार की पहल का नतीजा भी मानी जा रही है।
टाटा ग्रुप में विवाद का कारण
पिछले कुछ महीनों से टाटा ग्रुप आंतरिक विवादों के कारण सुर्खियों में है। विवाद की जड़ बोर्ड में नियुक्तियों और संचालन से जुड़ी नीतियों में है। ट्रस्ट में दो धड़े बन गए हैं – एक धड़ा नोएल टाटा के साथ है और दूसरा मेहली मिस्त्री के नेतृत्व में, जिनका संबंध शापूरजी पलोनजी परिवार से है। 11 सितंबर की बोर्ड बैठक में पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति पर मतभेद हुआ था। इसके बाद मेहली मिस्त्री को बोर्ड में नामित करने का प्रस्ताव आया, जिसे नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने खारिज किया।
सरकार की निगरानी
विवाद इतना बढ़ गया कि गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को हस्तक्षेप करना पड़ा। बैठक में नोएल टाटा, चंद्रशेखरन, वेणु श्रीनिवासन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल थे। विशेषज्ञों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी है, जिससे समूह के कामकाज और भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ता है।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस का संबंध
टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस की 66% हिस्सेदारी के जरिए समूह की 400 कंपनियों सहित 30 सूचीबद्ध कंपनियों को नियंत्रित करता है। ट्रस्ट में नोएल टाटा का नेतृत्व और मेहली मिस्त्री का धड़ा आपस में टाटा संस बोर्ड की सीटों को लेकर विवादित हैं। 11 सितंबर की बैठक में ट्रस्टियों ने बोर्ड में नामित निदेशकों के पुनर्नियुक्ति के मुद्दे पर मतभेद जताया, जिससे समूह में आंतरिक कलह बढ़ गई।
इस विवाद के बीच यह स्पष्ट है कि टाटा ट्रस्ट के निर्णय और ट्रस्टियों के बीच संतुलन बनाए रखना समूह की स्थिरता और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.