खाड़ी देशों में तनाव का प्याज किसानों पर सीधा असर, निर्यात में गिरावट

HIGHLIGHTS
- खाड़ी देशों में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के प्याज बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
- अंतरराष्ट्रीय मांग में गिरावट, शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी और घरेलू खपत में सुस्ती के चलते प्याज की कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
- हालात ऐसे बन गए हैं कि किसानों को अपनी उपज लागत से काफी कम दाम पर बेचनी पड़ रही है।
- अगर स्थिति लंबे समय तक ऐसी ही बनी रही तो इसका असर खेती के रुझान पर भी पड़ सकता है और किसान प्याज की खेती से दूरी बना सकते हैं।
- सरकार ने हालात को संभालने के लिए नेफेड और एनसीसीएफ…
खाड़ी देशों में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के प्याज बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय मांग में गिरावट, शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी और घरेलू खपत में सुस्ती के चलते प्याज की कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
हालात ऐसे बन गए हैं कि किसानों को अपनी उपज लागत से काफी कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। अगर स्थिति लंबे समय तक ऐसी ही बनी रही तो इसका असर खेती के रुझान पर भी पड़ सकता है और किसान प्याज की खेती से दूरी बना सकते हैं।
सरकार ने हालात को संभालने के लिए नेफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों को सक्रिय किया है, जिन्हें बाजार से प्याज खरीदकर बफर स्टॉक तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। भारत दुनिया के प्रमुख प्याज निर्यातक देशों में शामिल है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों जैसे यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, इराक और ओमान में जाता है।
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, खासकर ईरान और इजरायल से जुड़े हालात के कारण इन देशों में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसके चलते प्याज निर्यात में करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, जबकि खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात में 55 से 60 प्रतिशत तक की कमी आई है।
निर्यात घटने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। जो प्याज पहले विदेश भेजा जाता था, वह अब देश के भीतर ही बाजार में आ रहा है, जिससे सप्लाई बढ़ गई है लेकिन मांग उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। कई थोक बाजारों में प्याज 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जबकि इसकी उत्पादन लागत 1800 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है।
हार्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विकास सिंह के अनुसार, शिपिंग खर्च में भारी वृद्धि ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। पहले जहां एक कंटेनर का भाड़ा 500 से 800 डॉलर था, वह अब बढ़कर 6000 से 7500 डॉलर तक पहुंच गया है।
इस बढ़ी हुई लागत के कारण निर्यात अब व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा बन गया है, जिससे कई निर्यातक पीछे हट रहे हैं। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। वहीं घरेलू मांग भी होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर की धीमी रफ्तार और अन्य कारणों से कमजोर बनी हुई है।
बांग्लादेश जैसे पारंपरिक खरीदारों ने भी हाल के वर्षों में अपनी खरीद कम की है, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया है। हालांकि इस साल प्याज उत्पादन में लगभग 10 से 11 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है, लेकिन निर्यात घटने के कारण देश में आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है। यही वजह है कि उत्पादन में कमी के बावजूद कीमतों में तेजी नहीं देखी जा रही है।
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