आर्थिक सर्वे में झलकती है विकसित भारत की रूपरेखा: पीएम मोदी

नई दिल्ली। संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भारत की विकास यात्रा का स्पष्ट आईना बताया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच भी भारत ने जिस मजबूती के साथ आगे बढ़ना जारी रखा है, उसकी झलक इस रिपोर्ट में दिखाई देती है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह सर्वे केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि देश में हो रहे समावेशी विकास की कहानी है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री ने लिखा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत लगातार प्रगति की राह पर बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दस्तावेज में किसानों, लघु व मध्यम उद्योगों, युवाओं के रोजगार और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों को खास महत्व दिया गया है। पीएम मोदी ने आर्थिक सर्वेक्षण 2026 को विकसित भारत की दिशा में एक मार्गदर्शक दस्तावेज बताया, जो उत्पादन बढ़ाने, विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने और अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उपायों को रेखांकित करता है।
गुरुवार को जारी इस सर्वे में देश की विकास दर को लेकर उत्साहजनक अनुमान पेश किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच बढ़ने की संभावना है, जबकि चालू वर्ष में यह लगभग 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके साथ ही भारत लगातार चौथे साल दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सर्वे में भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता को भी बढ़ाकर 7 प्रतिशत आंका गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन सकारात्मक संकेतों का श्रेय प्रधानमंत्री के नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक नींव पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने उच्च विकास की दिशा बनाए रखी है। वित्त मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि नवाचार, उद्यमिता और बुनियादी ढांचे में हो रहा निवेश राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को नई गति दे रहा है।
आर्थिक सर्वेक्षण के जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भारत न केवल मौजूदा चुनौतियों से निपट रहा है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं के लिए भी खुद को तैयार कर रहा है।
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