भूपेंद्र यादव से मिलीं शताब्दी रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय भी रहे साथ; TMC में बढ़ी हलचल

HIGHLIGHTS
- तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान लगातार बढ़ती नजर आ रही है।
- इसी बीच पार्टी के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं तेज हो गई हैं।
- दूसरी ओर, टीएमसी के असंतुष्ट सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने की तैयारी में हैं, जहां वे खुद को “वास्तविक टीएमसी संसदीय दल” के रूप में मान्यता देने की मांग उठा सकते हैं।
- सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई एक अहम बैठक में पार्टी के भीतर असंतोष का मुद्दा खुलकर साम…
तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान लगातार बढ़ती नजर आ रही है। इसी बीच पार्टी के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। दूसरी ओर, टीएमसी के असंतुष्ट सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने की तैयारी में हैं, जहां वे खुद को “वास्तविक टीएमसी संसदीय दल” के रूप में मान्यता देने की मांग उठा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई एक अहम बैठक में पार्टी के भीतर असंतोष का मुद्दा खुलकर सामने आया। दावा किया जा रहा है कि लगभग 19 सांसद असंतुष्ट खेमे के समर्थन में हैं और यदि सुदीप बंद्योपाध्याय भी इस समूह के साथ आते हैं, तो यह संख्या 20 तक पहुंच सकती है।
असंतुष्ट धड़े से जुड़े एक नेता ने यह भी संकेत दिया है कि वे लोकसभा में नेतृत्व के लिए सुदीप बंद्योपाध्याय का नाम आगे कर सकते हैं। इससे पहले भी बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर मुलाकात कर रणनीति पर चर्चा की थी।
यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच सामने आया है, जहां पार्टी के भीतर मतभेद और अलगाव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। टीएमसी के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं, जिनमें से कुछ के इस्तीफे और असंतोष ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने असंतुष्ट धड़े पर निशाना साधते हुए कहा है कि कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए अलग रुख अपना रहे हैं। वहीं, पार्टी के भीतर चल रहे इस घटनाक्रम को विपक्षी दलों द्वारा भी बारीकी से देखा जा रहा है।
हाल ही में कुछ सांसदों के इस्तीफों ने भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ाई हैं। इनमें कुछ नेताओं ने निजी कारणों का हवाला दिया, जबकि कुछ ने संगठनात्मक मुद्दों और राजनीतिक परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.