‘आज का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा’, भारत-यूएस ट्रेड डील पर बोले पीयूष गोयल

भारत और अमेरिका ने 500 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार लक्ष्य को लेकर एक अंतरिम व्यापार ढांचे पर सहमति बना ली है। इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक बड़ी छलांग माना जा रहा है। इससे न सिर्फ द्विपक्षीय कारोबार को रफ्तार मिलेगी, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे और ज्यादा खुलेंगे। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को इस समझौते को भारत के विकास पथ के लिए अहम करार दिया।
पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते के जरिए भारत के निर्यातकों को 30 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिकी अर्थव्यवस्था तक बेहतर शुल्क शर्तों के साथ पहुंच मिलेगी। उन्होंने बताया कि भारत-अमेरिका के बीच जारी संयुक्त बयान को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। गोयल के मुताबिक, यह दिन भारत के आर्थिक इतिहास में विशेष स्थान रखेगा और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है।
फरवरी 2025 से दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य आपसी व्यापार को सालाना 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना था। गोयल ने कहा कि यह अंतरिम समझौता उसी दिशा में एक ठोस आधार तैयार करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दोनों नेताओं की दूरदृष्टि ने इस करार को संभव बनाया।
निर्यातकों, MSME और किसानों को मिलेगा फायदा
गोयल के अनुसार, इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), किसानों और मछुआरों के लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा कि यह करार व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ निवेश, तकनीक और रोजगार के नए रास्ते खोलेगा।
कई उत्पादों पर शून्य शुल्क
नए व्यापार ढांचे के तहत भारत के कई प्रमुख निर्यात उत्पादों को अमेरिका में बिना शुल्क के प्रवेश मिलेगा। रत्न और आभूषण, जेनेरिक दवाएं और फार्मास्यूटिकल उत्पाद अब शून्य टैरिफ पर निर्यात किए जा सकेंगे। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा कॉफी, आम, चाय, मसाले, नारियल तेल, सुपारी, वनस्पति मोम, विभिन्न फल-सब्जियां और कई कृषि उत्पाद भी बिना शुल्क के अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकेंगे। गोयल ने बताया कि कुछ वस्तुएं, जिन पर पहले 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगता था, अब पूरी तरह शुल्क मुक्त होंगी।
प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले भारत को बढ़त
पीयूष गोयल ने कहा कि जहां चीन पर 35 प्रतिशत, बांग्लादेश और वियतनाम पर 25 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया है, वहीं भारत को अपेक्षाकृत कम शुल्क का लाभ मिला है। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता और मजबूत होगी।
किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं
गोयल ने स्पष्ट किया कि इस व्यापार समझौते में भारत के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जीएम फूड्स को भारत में अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा, रागी जैसे प्रमुख अनाज, डेयरी उत्पाद, मांस, मुर्गी, सोयाबीन, चीनी और इथेनॉल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी सुरक्षा दी गई है।
काबुली चना, तंबाकू और भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादित फल भी इस समझौते से बाहर रखे गए हैं। गोयल ने भरोसा दिलाया कि यह करार किसानों, MSME, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के हितों को किसी भी तरह नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
रूसी तेल से जुड़े सवाल पर गोयल ने कहा कि इस विषय पर विदेश मंत्रालय की ओर से स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.