वेनेजुएला में सैन्य अभियान के जरिए अमेरिका ने चीन को दी चेतावनी, महाद्वीप से दूर रहो

पिछले सप्ताह अमेरिकी सेना की गोपनीय कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया गया। इस अभियान के पीछे कई रणनीतिक उद्देश्य बताए जा रहे हैं, जिनमें चीन को स्पष्ट संदेश देना भी शामिल है कि अमेरिका अपने महाद्वीपीय प्रभाव क्षेत्र में किसी प्रतिद्वंद्वी को प्रवेश नहीं करने देगा।
चीन पिछले दो दशकों से लैटिन अमेरिका में अपने आर्थिक और भू-राजनीतिक कदम बढ़ा रहा है। अर्जेंटीना में उपग्रह ट्रैकिंग स्टेशन, पेरू में बंदरगाह और वेनेजुएला में आर्थिक निवेश इसके उदाहरण हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वेनेजुएला पर यह कार्रवाई चीन की महाद्वीपीय महत्वाकांक्षाओं को सीमित करने के लिए भी की गई।
ट्रंप ने तेल कंपनियों को क्या संदेश दिया
शुक्रवार को ट्रंप ने तेल कंपनियों के अधिकारियों से कहा कि अमेरिका अपने क्षेत्र में चीन और रूस जैसी ताकतों की मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका व्यापार के लिए खुला है, लेकिन अपनी भू-राजनीतिक सीमाओं की रक्षा करेगा।
सैन्य कार्रवाई से चीन को झटका
तीन जनवरी को अमेरिकी कमांडो ने काराकास में मादुरो को गिरफ्तार किया और वेनेजुएला से अपने देश ले गए। इस कार्रवाई में अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला की हवाई सुरक्षा प्रणालियों को जल्दी निष्क्रिय किया, जिनमें चीन और रूस के बनाए उपकरण शामिल थे। अमेरिकी अधिकारी दावा कर रहे हैं कि रोके गए तेल के तीन से पांच करोड़ बैरल अब अमेरिका में भेजे जाएंगे, जो पहले चीन की ओर जाने वाले थे।
विश्लेषकों का कहना है कि मादुरो की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट किया कि पश्चिमी गोलार्ध में चीन की शक्ति सीमित है। ‘फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज’ के विशेषज्ञ क्रेग सिंगलटन का कहना है कि चीन कूटनीतिक विरोध कर सकता है, लेकिन जब अमेरिका सीधे कार्रवाई करता है, तो वह अपने साझेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता।
चीनी प्रतिक्रिया
वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की और इसे एकतरफा और गैरकानूनी बताया। दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि चीन लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों का मैत्रीपूर्ण साझेदार बना रहेगा।
अस्पष्ट अमेरिकी नीति और भविष्य की चुनौतियां
ट्रंप प्रशासन की चीन नीति मिश्रित दिखती है—एक ओर व्यापार युद्ध को शांत करने के प्रयास, तो दूसरी ओर ताइवान और वेनेजुएला जैसी मामलों में सख्ती। विशेषज्ञ माइकल सोबोलिक का कहना है कि चीन अब अपनी सुरक्षा प्रणालियों का आकलन कर रहा है और यह देखने की कोशिश कर रहा है कि अमेरिका की सैन्य पहुंच के सामने उसकी तकनीक कितनी प्रभावी है।
साथ ही, क्षेत्र में चीन के अन्य प्रभाव क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ सकता है। क्यूबा में अमेरिकी संदेह है कि चीन खुफिया गतिविधियों में शामिल हो रहा है। ट्रंप प्रशासन पनामा नहर और अन्य जलमार्गों पर भी चीन की कंपनियों की पहुंच सीमित करने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।
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