भारत के साथ व्यापार में चीन जैसी गलती नहीं दोहराएगा अमेरिका: क्रिस्टोफर लैंडौ

नई दिल्ली में आयोजित रायसीना संवाद के दौरान अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक संबंधों में वही गलतियां नहीं दोहराना चाहता जो अतीत में चीन के साथ हुई थीं। उनके अनुसार यह नीति अमेरिकी आर्थिक हितों को घरेलू और विदेश नीति दोनों में प्राथमिकता देती है।
लैंडौ ने फरवरी 2026 में हुए अमेरिका-भारत अंतरिम शुल्क समझौते का भी उल्लेख किया। इस व्यवस्था के तहत कुछ उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। उन्होंने संकेत दिया कि यह समझौता ‘अमेरिका फर्स्ट’ दृष्टिकोण के तहत हुई बातचीत के बाद तैयार हुआ, जिसमें अमेरिकी हितों को ध्यान में रखा गया।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को चीन के साथ अपने पिछले अनुभवों से सीख मिली है। वॉशिंगटन ने कभी विश्व व्यापार संगठन में चीन के प्रवेश का समर्थन इस उम्मीद में किया था कि इससे अमेरिकी कारोबार को नए बाजार और मजबूत सप्लाई चेन मिलेंगी। लेकिन बाद के वर्षों में कई व्यापारिक क्षेत्रों में चीन अमेरिका के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा बन गया।
लैंडौ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को यह समझना चाहिए कि अमेरिका दो दशक पहले की उन परिस्थितियों को दोहराने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ‘अमेरिका फर्स्ट’ का मतलब अलग-थलग पड़ना नहीं है, बल्कि अपने हितों को ध्यान में रखते हुए सहयोग के रास्ते तलाशना है।
उनके मुताबिक अमेरिका भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को अहम मानता है और दोनों देशों के संबंधों को पारस्परिक लाभ के आधार पर आगे बढ़ाना चाहता है। लैंडौ ने कहा कि यह नीति ऐसे राष्ट्रवाद को दर्शाती है जिसमें सहयोग बना रहता है, लेकिन प्राथमिकता अपने-अपने देशों के हितों को दी जाती है।
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