विजय की आखिरी फिल्म पर कानूनी अड़चन, एससी ने की याचिका खारिज

अभिनेता से राजनीति में कदम रखने वाले विजय की बहुचर्चित फिल्म ‘जन नायकन’ एक बार फिर कानूनी कारणों से सुर्खियों में है। मद्रास हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद फिल्म निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज करते हुए उन्हें वापस हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है।
फिल्म के निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जब मामला पहले से मद्रास हाईकोर्ट में विचाराधीन है और सुनवाई की तारीख तय है, तो सुप्रीम कोर्ट में दखल का कोई औचित्य नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विवाद पर मद्रास हाईकोर्ट 20 जनवरी को सुनवाई करेगा। अदालत ने निर्माताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि वह इस मामले में सुनवाई के लिए इच्छुक नहीं है।
सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि फिल्म 9 जनवरी को रिलीज के लिए तय थी और देशभर में करीब 5000 सिनेमाघरों में प्रदर्शन की तैयारी पूरी हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि पहले यह संकेत दिया गया था कि 10 कट लगाने के बाद फिल्म को प्रमाणपत्र मिल सकता है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब हाईकोर्ट में मामला लंबित है और तारीख भी तय हो चुकी है, तो सीधे सुप्रीम कोर्ट आना उचित नहीं है। अदालत ने निर्माताओं को हाईकोर्ट में ही अपनी बात रखने की सलाह दी।
रिलीज क्यों अटकी?
‘जन नायकन’ को विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है, क्योंकि पिछले साल उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलग वेत्री कझगम (TVK) की स्थापना की थी। यह फिल्म 9 जनवरी 2025 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से मंजूरी न मिलने के कारण इसकी रिलीज टाल दी गई।
फिल्म को 18 दिसंबर को CBFC के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। बोर्ड ने कई दृश्यों पर आपत्ति जताते हुए करीब 27 कट लगाने का सुझाव दिया था।
इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 9 जनवरी को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने फिल्म को U/A सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया था। हालांकि, CBFC ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई।
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