खाड़ी संकट के बीच रूस ने भारत को ऊर्जा आपूर्ति में मदद का भरोसा दिया

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तेज संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर देने से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा प्रभावित हो गया है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आया है और भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
रूस ने इस संकट के बीच भारत को ऊर्जा आपूर्ति में मदद का भरोसा दिया है। एक रूसी सूत्र के अनुसार, यदि क्षेत्र में कोई व्यवधान आता है तो रूस आवश्यक तेल और ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। यह घोषणा उस समय आई है जब भारत ने क्षेत्र में अपने एक करोड़ से अधिक नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निर्बाधता पर चिंता व्यक्त की थी।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की श्रृंखला सीधे इस भू-भाग से गुजरती है, और किसी भी बड़े व्यवधान का अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट: भारत की जीवनरेखा
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आयात का लगभग 50 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का 54 प्रतिशत होर्मुज स्ट्रेट से होकर प्राप्त करता है। कतर और यूएई से आने वाली एलएनजी इसी मार्ग से भारत पहुंचती है।
संघर्ष चौथे दिन भी जारी है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर है। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र में अन्य लक्ष्यों पर जवाबी हमले किए। इसी कारण होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही रुक गई है।
कतर की एलएनजी आपूर्ति पर असर
भारत के प्रमुख एलएनजी आपूर्तिकर्ता कतर ने ईरानी ड्रोन हमलों के बाद उत्पादन को रोक दिया है। फोर्स मेज्योर लागू होने के कारण भारत को एलएनजी की सप्लाई में लगभग 40 प्रतिशत कटौती का सामना करना पड़ रहा है। पीटीआई के अनुसार, कतर भारत को सालाना करीब 27 मिलियन टन एलएनजी की आपूर्ति करता है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है। पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने मार्केटर्स को सूचित किया है कि आपूर्ति बाधित है, जिससे कई उद्योगों में गैस की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सरकार इस स्थिति में वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही है।
तेल की कीमत और महंगाई
रूस के साथ ऊर्जा सहयोग मजबूत होने से भारत को राहत मिल सकती है, क्योंकि रूस पहले से ही भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल और आम उपभोक्ताओं पर महंगाई के रूप में दिख सकता है।
केंद्र सरकार ने स्थिति पर लगातार नजर रखी हुई है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी विकल्प खुले रखे हैं। साथ ही, भारत ने क्षेत्र में फंसे नागरिकों की सुरक्षित निकासी और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की तैयारी की है। वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने की योजना पर भी काम जारी है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.