इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड में रेयान को किया बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो अप्रैल 2016 में एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या मामले में निचली अदालत द्वारा फांसी की सजा पाए आरोपी रेयान को बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को गंभीर त्रुटिपूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला पूरी तरह संदेहपूर्ण है। इसी मामले में फांसी पाए दूसरे आरोपी मुनीर की पहले ही मृत्यु हो चुकी है।
इस हत्याकांड की घटना तब हुई थी जब तंजील अहमद और उनकी पत्नी शादी समारोह से देर रात लौट रहे थे। बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे तंजील अहमद की मौके पर और उनकी पत्नी फरजाना की उपचार के दौरान अगले दिन मौत हो गई।
इस मामले में निचली अदालत ने सहसपुर निवासी मुनीर और रेयान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य आरोपियों तंजीम, जैनी और रिजवान को बरी कर दिया गया था। रेयान और मुनीर के परिजन ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील लंबित रहते हुए 19 नवंबर 2022 को मुनीर की मृत्यु हो गई।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष गवाहों के बयान को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। न्यायालय ने अपने 31 मार्च 2026 के आदेश में कहा कि निचली अदालत ने मृत्युदंड देने में गंभीर गलती की। इसी आधार पर रेयान को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया। रेयान के पिता सादात हुसैन ने फैसले को इंसाफ की जीत बताते हुए संतोष जताया।
2016 की इस वारदात में तंजील अहमद पर 24 गोलियां चलाई गईं और उनके शरीर पर कुल 33 घाव पाए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हमले की क्रूरता और हमलावरों की नीयत स्पष्ट कर दी थी। प्रारंभिक जांच में इसे आतंकवादी हमला माना गया, लेकिन आगे चलकर मामले की दिशा लेन-देन के विवाद की ओर मोड़ दी गई।
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर मुनीर, रेयान, रिजवान, जैनी और तंजीम को गिरफ्तार किया गया था। अदालत में पेश होने के बाद सभी को जेल भेजा गया।
डीएसपी तंजील अहमद के भाई रागिब मसूद ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि घटना के समय उनकी बेटी और छोटे बेटे के गवाह होने के कारण उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है, और वे अंतिम न्याय सुनिश्चित करने तक लड़ेंगे।
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