मेटा के राइट्स मैनेजर पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, क्रिएटर्स को एक्सेस न देने पर मांगा जवाब

HIGHLIGHTS
- कंपनी ने राइट्स मैनेजर एक्सेस को वेरिफिकेशन प्रक्रिया से जुड़ा बताया
- हाईकोर्ट ने मेटा से पात्रता और एक्सेस नियमों की जानकारी मांगी
- अन्य क्रिएटर्स से जुड़े कॉपीराइट स्ट्राइक मामले भी अदालत में pendientes हैं
सोशल मीडिया पर कंटेंट की चोरी रोकने के लिए मेटा का राइट्स मैनेजर एक अहम टूल माना जाता है। यह क्रिएटर्स और कॉपीराइट धारकों को उनके ओरिजिनल कंटेंट की पहचान करने और बिना अनुमति दोबारा अपलोड किए गए कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद करता है। हालांकि, अब इस टूल की पहुंच और इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा से जवाब मांगा है।
यह मामला कंटेंट क्रिएटर और बिजनेस कोच मोहित कुमार की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके अकाउंट के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक का इस्तेमाल किया गया और इसके बाद उनसे पैसे वसूलने की कोशिश की गई।
बड़े क्रिएटर को राइट्स मैनेजर का एक्सेस क्यों नहीं?
मोहित कुमार की ओर से अदालत में पेश वकील ने दावा किया कि बड़ी संख्या में फॉलोअर्स और व्यूज वाले क्रिएटर्स को भी राइट्स मैनेजर का एक्सेस नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कुमार ने इस टूल के लिए तीन बार आवेदन किया, लेकिन हर बार उनका अनुरोध खारिज कर दिया गया।
वकील ने आरोप लगाया कि कथित स्कैमर्स इसी सिस्टम का इस्तेमाल वास्तविक क्रिएटर्स के खिलाफ कॉपीराइट स्ट्राइक जारी करने के लिए कर रहे हैं।
इस पर जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने मेटा से उसकी नीति, गाइडलाइंस और राइट्स मैनेजर की पात्रता से जुड़े नियम अदालत के सामने रखने को कहा। मेटा की ओर से भी कहा गया कि कंपनी इन शर्तों और कुमार को एक्सेस नहीं देने के कारणों को रिकॉर्ड पर रखेगी।
8 करोड़ से घटकर 3 लाख रह गए व्यूज?
अदालत को बताया गया कि कथित कॉपीराइट स्ट्राइक शुरू होने से पहले मोहित कुमार के कंटेंट को हर महीने करीब 7-8 करोड़ व्यूज मिलते थे। उनके मुताबिक, बाद में यह संख्या घटकर लगभग 3 लाख व्यूज प्रति माह रह गई।
कुमार के वकील ने अदालत को बताया कि राइट्स मैनेजर किस तरह काम करता है। क्रिएटर के ओरिजिनल कंटेंट की पहचान सिस्टम में होने के बाद अगर कोई दूसरा व्यक्ति वही या मिलता-जुलता कंटेंट अपलोड करता है, तो यह टूल उसका पता लगा सकता है। इसके बाद अधिकार रखने वाला व्यक्ति कंटेंट को ब्लॉक करने या कॉपीराइट स्ट्राइक लगाने जैसी कार्रवाई कर सकता है।
मेटा ने अदालत में क्या कहा?
मेटा की ओर से अदालत में कहा गया कि राइट्स मैनेजर का एक्सेस वेरिफिकेशन प्रक्रिया के अधीन है। कंपनी के अनुसार, किसी व्यक्ति के कंटेंट पर अधिकार का दावा सही है या किसी दूसरे व्यक्ति का दावा सही है, यह तुरंत तय करना हमेशा संभव नहीं होता।
हालांकि, अदालत ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान जस्टिस भंभानी ने टिप्पणी की कि जिन क्रिएटर्स की बड़ी फॉलोइंग और व्यूअरशिप है, उन्हें ऐसे एंटी-प्लेजरिज्म टूल का एक्सेस मिलना चाहिए।
अदालत ने मौजूदा स्थिति पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसकी तुलना “घर के मालिक को नहीं, चोर को चाबी देने” जैसी स्थिति से की।
पहले की स्ट्राइक भी हटाई गईं
कॉपीराइट स्ट्राइक के मामले में मेटा ने बताया कि तकनीकी जांच के बाद कुमार के अकाउंट पर लगाई गई स्ट्राइक हटा दी गई हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उनका अकाउंट कभी सस्पेंड नहीं किया गया था।
अब अदालत इस मामले में मेटा की नीतियों और राइट्स मैनेजर तक पहुंच से जुड़े नियमों की समीक्षा करेगी। साथ ही, कोर्ट एक दूसरे मामले के संदर्भ में यह भी विचार कर रही है कि कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर अकाउंट सस्पेंड करना आईटी एक्ट की धारा 79 और सुप्रीम कोर्ट के श्रेया सिंघल फैसले से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।
मेटा के खिलाफ ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही
यह मामला अकेला नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट में मेटा के कॉपीराइट स्ट्राइक सिस्टम के कथित दुरुपयोग से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। कंटेंट क्रिएटर नितिन जोशी ने एक PIL में फर्जी इंस्टाग्राम कॉपीराइट स्ट्राइक के जरिए कथित संगठित वसूली के रैकेट का आरोप लगाया है। इसके अलावा क्रिएटर्स मोहम्मद नवाज शेख और प्रतीक सहनी से जुड़े मामले भी अदालत के सामने हैं।
ऐसे में राइट्स मैनेजर की पात्रता, कॉपीराइट स्ट्राइक की सत्यता और शिकायतों की जांच की प्रक्रिया पर अब अदालत की नजर है। इस सुनवाई के बाद यह सवाल भी अहम हो गया है कि कंटेंट की सुरक्षा के लिए बनाया गया सिस्टम कहीं खुद क्रिएटर्स के लिए परेशानी का कारण तो नहीं बन रहा है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.