अंकिता भंडारी केस: दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर एसडीएफ के सवाल, सीबीआई जांच पूरी करने की मांग

HIGHLIGHTS
- गंगटोक, नामची, ग्यालशिंग और जोरथांग में आयोजित हुए कार्यक्रम।
- प्रत्येक स्थान पर अंकिता की याद में 108 मोमबत्तियां जलाई गईं।
- अंकिता के परिवार की ओर से उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग।
सिक्किम में अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्षी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने दुष्यंत गौतम को राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि उनके पद संभालने से पहले अंकिता भंडारी मामले की सीबीआई जांच पूरी की जाए। इस मांग को लेकर पार्टी ने राज्य में चार स्थानों पर कैंडल मार्च निकाला और पीड़ित परिवार के प्रति एकजुटता जताई।
एसडीएफ ने शनिवार को गंगटोक स्थित पार्टी मुख्यालय के अलावा नामची और ग्यालशिंग के जिला कार्यालयों तथा जोरथांग स्थित पार्टी कार्यालय में कैंडल मार्च आयोजित किया। पार्टी के अनुसार, प्रत्येक स्थान पर अंकिता की याद में 108 मोमबत्तियां जलाई गईं। इस आयोजन का उद्देश्य अंकिता को श्रद्धांजलि देना, उनके परिवार के साथ एकजुटता दिखाना और न्याय की मांग करना था।
पार्टी ने कहा कि अंकिता के परिवार की ओर से उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। एसडीएफ ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग जारी रहेगी।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर एसडीएफ ने क्यों उठाए सवाल?
विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम ही वह 'वीआईपी' थे, जिन्होंने 19 वर्षीय अंकिता भंडारी से कथित तौर पर अनुचित मांग की थी। हालांकि, यह एक आरोप है, जिसे गौतम ने खारिज किया है।
एसडीएफ ने अपने बयान में कहा कि अंकिता के परिवार की ओर से उठाए गए अनसुलझे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी चाहती है कि दुष्यंत गौतम के सिक्किम के राज्यपाल का पद संभालने से पहले सीबीआई जांच पूरी हो जाए।
एसडीएफ महिला मोर्चा की प्रभारी उपाध्यक्ष कोमल चामलिंग भी गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि जांच लंबित रहने के दौरान उन्हें राज्यपाल नियुक्त करना सिक्किम के लोगों का अपमान है।
कब और कहां हुई थी अंकिता भंडारी की हत्या?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को दोषी ठहराया गया था। पुलकित आर्य पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
मामले में एक अज्ञात वीआईपी की कथित भूमिका को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था। अंकिता के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहलू की जांच की मांग की थी। इसी संदर्भ में दुष्यंत गौतम का नाम आरोपों में सामने आया। गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही भी शुरू की है।
राज्यपाल को मिलने वाली संवैधानिक छूट पर विवाद
एसडीएफ ने संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल को मिलने वाली संवैधानिक छूट को लेकर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि अंकिता मामले में जिन सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
एसडीएफ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने जोर दिया कि अंकिता के परिवार को न्याय मिलना जरूरी है।
विवाद का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि राज्यपाल का पद संभालने के बाद मिलने वाली संवैधानिक छूट का मामले की जांच पर क्या असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जताई चिंता
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने पत्र में कहा कि राज्यपाल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही न तो शुरू की जा सकती है और न ही जारी रखी जा सकती है।
राहुल गांधी के मुताबिक, गौतम को राज्यपाल नियुक्त किए जाने से वह सीबीआई की पहुंच से बाहर हो सकते हैं, जबकि एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है।
इस तरह अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय और सीबीआई जांच की मांग के साथ दुष्यंत गौतम की नियुक्ति तथा राज्यपाल को मिलने वाली संवैधानिक छूट का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
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