बिजनौर: नकली डॉक्टर ने अस्पताल में मरीजों का इलाज किया, ऐसे हुआ खुलासा

बिजनौर। मेडिकल अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। अस्पताल में टीबी और छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. तुषार की ओपीडी में एक फर्जी डॉक्टर असली मरीजों का इलाज करता पाया गया। जब अस्पताल स्टाफ ने खुद जाकर जांच की, तो हड़कंप मच गया और मौके का फायदा उठाकर फर्जी डॉक्टर वहां से भाग गया।
सूचना के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे फार्मासिस्ट राजेश रवि और अन्य स्टाफ सदस्य कमरे नंबर 25 में पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक अजनबी व्यक्ति मास्क लगाकर डॉ. तुषार की कुर्सी पर बैठा है और मरीजों के पर्चों पर दवाइयां लिख रहा है। इस दौरान असली डॉक्टर मौजूद नहीं थे। स्टाफ ने तुरंत डॉ. तुषार को फोन किया, जिस पर उसने अजनबी को अपना असिस्टेंट बताया और कहा कि वह बीएएमएस चिकित्सक है।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। डॉ. राजीव रस्तोगी और अन्य स्टाफ ने फर्जी डॉक्टर से पूछताछ की, लेकिन उसने खुद को डॉक्टर होने से इनकार कर दिया और मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। बाद में डॉ. तुषार ने भी उस व्यक्ति को पहचानने से इनकार कर दिया। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
असली मुहर कैसे मिली?
स्टाफ का कहना है कि लंबे समय से डॉ. तुषार की मुहर वाले पर्चों पर कई महीने तक लगातार दवाइयां लिखी जा रही थीं। पुराने मरीजों को बार-बार सीएसटी (कंटीन्यू सेम ट्रीटमेंट) दवाइयां दी जा रही थीं। जब यह पैटर्न स्टाफ के ध्यान में आया, तब उन्होंने जांच की और फर्जी डॉक्टर का पता चला।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि फर्जी डॉक्टर के पास असली मुहर कैसे आई। चीफ फार्मासिस्ट राजेश रवि ने बताया कि उन्हें कई पुराने पर्चे मिले थे, जिन पर लगातार सीएसटी लिखी जा रही थी। शुक्रवार को शक होने पर स्टाफ ने कमरे में जाकर देखा कि एक अजनबी व्यक्ति दवा लिख रहा है। डॉ. तुषार ने उस व्यक्ति का नाम पूछने पर “दिनेश” बताया और शुरुआत में उसका अस्पताल आने का वादा किया, लेकिन बाद में पहचानने से इनकार कर दिया।
डॉ. तुषार का बयान
“मुझे इस घटना की जानकारी नहीं थी। घटना के समय हम इमरजेंसी में व्यस्त थे। वीडियो में दिख रहे डॉक्टर को मैं नहीं जानता। इंटर्न और जूनियर रेजिडेंट आते रहते हैं, इसलिए ‘दिनेश’ नाम सुनकर उसे असिस्टेंट मान लिया।” – डॉ. तुषार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
“इस मामले में एक कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यह जांच यह पता लगाएगी कि फर्जी व्यक्ति हमारी मुहर का इस्तेमाल करके दवा कैसे लिख रहा था।” – डॉ. बी.आर. त्यागी, सीएमएस, मेडिकल अस्पताल
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