JNU से बर्खास्तगी पर बिमोल अकोइजाम का पलटवार, बोले- अदालत में दूंगा चुनौती

HIGHLIGHTS
- JNU ने 9 अक्टूबर 2026 को बिमोल अकोइजाम को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाया था
- अकोइजाम ने जांच प्रक्रिया और रिपोर्ट तैयार करने के समय पर सवाल उठाए।
- उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए बर्खास्तगी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।
कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद सेवा से हटाए जाने के फैसले पर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘विच हंट’ यानी चुन-चुनकर निशाना बनाने की मुहिम करार दिया। अकोइजाम का आरोप है कि मणिपुर और पूर्वोत्तर के मुद्दों पर उनकी बेबाक आवाज को दबाने के लिए राजनीतिक बदले की भावना से यह कदम उठाया गया। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला। अकोइजाम ने स्पष्ट किया कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे।
‘जांच बंद होने के एक घंटे के भीतर तैयार हुई रिपोर्ट’
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अकोइजाम ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उनके मुताबिक, उन्हें दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर ईमेल मिला, जिसमें जांच बंद होने की जानकारी दी गई थी। इसके करीब एक घंटे के भीतर रिपोर्ट तैयार कर कुलपति को सौंप दी गई, लेकिन उन्हें रिपोर्ट की प्रति नहीं दी गई।
अकोइजाम का दावा है कि इसके कुछ ही समय बाद उन्हें बर्खास्त करने का आदेश जारी हो गया और दोपहर ढाई बजे तक यह मामला मीडिया में लीक हो गया। उन्होंने कुलपति के कथित बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब उन्होंने खुद रिपोर्ट नहीं पढ़ी थी, तो इतनी जल्दी बर्खास्तगी का आदेश कैसे जारी कर दिया गया। अकोइजाम के अनुसार, शुरुआत से ही जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं।
‘अकादमिक शिकायत यौन उत्पीड़न के मामले में कैसे बदली?’
यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करते हुए अकोइजाम ने कहा कि शुरुआती शिकायत विभाग में अकादमिक विषयों और पढ़ाने के तरीके से संबंधित मामलों को लेकर की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यह मामला अचानक यौन उत्पीड़न और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण कानून (पॉश एक्ट) के तहत कैसे आ गया।
उन्होंने दावा किया कि मीडिया में सामने आए ‘अंकों के बदले यौन संबंध’ जैसे आरोप मूल शिकायत में शामिल नहीं थे। अकोइजाम ने शिकायत से जुड़े 97 छात्रों और 15 हस्ताक्षरकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि हस्ताक्षर करने वालों में तीन लड़के भी शामिल हैं। उन्होंने इन बातों के आधार पर शिकायत की प्रकृति और पॉश कानून के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। हालांकि, ये दावे अकोइजाम की ओर से किए गए हैं।
‘300 नहीं, मुझे मिले थे सिर्फ 43-44 ईमेल’
जांच में सहयोग नहीं करने के विश्वविद्यालय प्रशासन के आरोपों को भी अकोइजाम ने गलत बताया। उनका कहना है कि कुलपति की ओर से मीडिया में 300 ईमेल भेजे जाने की बात कही जा रही है, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें केवल 43 या 44 ईमेल मिलने की जानकारी सामने आएगी।
अकोइजाम ने दावा किया कि उन्होंने 31 मई को लिखित जवाब दिया था और 16 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अपना बयान दर्ज कराया था। उनके मुताबिक, 14 अगस्त को उनके आठ गवाह भी जांच पैनल के सामने पेश हुए थे। उन्होंने कहा कि अदालत में सभी रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे, जिससे जांच में सहयोग नहीं करने के आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी।
‘पूर्वोत्तर की आवाज दबाना चाहती है सरकार’
अकोइजाम ने इस कार्रवाई को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने और अपने क्षेत्र के मुद्दों को खुलकर उठाने वाले पूर्वोत्तर के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि भाजपा चाहती है कि मणिपुर और पूर्वोत्तर के लोग चुप रहें और सत्ता के सामने झुककर रहें, लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे।
अकोइजाम ने कहा, ‘मैं चुप रहने वालों में से नहीं हूं। वे मुझे खामोश करने में कामयाब नहीं होंगे। मणिपुर और पूर्वोत्तर से हजारों बिमोल उठ खड़े होंगे।’
उन्होंने दोहराया कि वह इस मामले को अदालत तक ले जाएंगे और कानूनी तरीके से अपना पक्ष रखेंगे।
9 अक्टूबर को तत्काल प्रभाव से किया गया था बर्खास्त
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को अकोइजाम को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने का आदेश जारी किया था। विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार, आंतरिक समिति ने जांच के निष्कर्षों के आधार पर उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
अकोइजाम विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र में कार्यरत थे। उन पर 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
पुलिस ने भी दर्ज की है एफआईआर
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। 11 अक्टूबर 2026 को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है। वहीं, अकोइजाम ने विश्वविद्यालय के बर्खास्तगी के फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है। अब जांच के निष्कर्ष और अदालत में होने वाली सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।
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