अभिषेक बनर्जी पर 550 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप, दो नई FIR दर्ज

HIGHLIGHTS
- तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं।
- उनके खिलाफ करीब 550 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
- यह कार्रवाई उनके संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में की गई है।
- पहली एफआईआर दक्षिण 24 परगना जिले के कालीतला थाने में दर्ज हुई है, जिसमें लगभग 300 करोड़ रुपये की अवैध मिट्टी खनन और चोरी का आरोप लगाया गया है।
- वहीं दूसरी एफआईआर विष्णुपुर थाने में दर्ज की गई है, जिसमें चक्रवात ‘अम्…
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। उनके खिलाफ करीब 550 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। यह कार्रवाई उनके संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में की गई है।
पहली एफआईआर दक्षिण 24 परगना जिले के कालीतला थाने में दर्ज हुई है, जिसमें लगभग 300 करोड़ रुपये की अवैध मिट्टी खनन और चोरी का आरोप लगाया गया है। वहीं दूसरी एफआईआर विष्णुपुर थाने में दर्ज की गई है, जिसमें चक्रवात ‘अम्फन’ के दौरान राहत सामग्री वितरण में करीब 250 करोड़ रुपये की अनियमितता का दावा किया गया है।
इन मामलों में अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित राय के साथ-साथ कई तत्कालीन ब्लॉक स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। एफआईआर भाजपा नेता अभिजीत दास की शिकायत पर दर्ज की गई है। इसमें कई गैर-जमानती धाराओं का भी उल्लेख किया गया है।
इसी बीच, अभिषेक बनर्जी से विभिन्न मामलों को लेकर जांच एजेंसियों की पूछताछ भी लगातार जारी है। हाल ही में विधानसभा चुनाव के दौरान कथित भड़काऊ भाषण मामले में उनसे कोलकाता स्थित भवानी भवन में सीआईडी ने करीब साढ़े छह घंटे तक पूछताछ की।
इसके अलावा शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को उनसे लगभग 11 घंटे तक सवाल-जवाब किए थे। इससे एक दिन पहले विधानसभा में तृणमूल विधायकों के कथित जाली हस्ताक्षर मामले में भी सीआईडी ने उनसे करीब साढ़े आठ घंटे तक पूछताछ की थी।
लगातार चल रही इन कार्रवाइयों के बीच पिछले चार दिनों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा उनसे कुल मिलाकर 30 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की जा चुकी है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
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